गरियाबंद , सितंबर 09 -- छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के अमलीपदर स्थित एक निजी क्लीनिक में उपचार के बाद युवक की मौत के मामले में परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच के लिए टीम गठित करने की बात कही है।
मैनपुर विकासखंड के सराईपानी गांव निवासी डिगने यादव की जन्माष्टमी के दिन उपचार के दौरान मौत हो गई थी। परिजनों के मुताबिक डिगने को बुखार की शिकायत के बाद अमलीपदर के एक निजी क्लीनिक में उपचार के लिए ले जाया गया था। उनका आरोप है कि क्लीनिक में दवाओं के साथ आर्टीसुनेट इंजेक्शन की कई खुराक दिए जाने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई।
परिजनों ने बताया कि हालत बिगड़ने पर डिगने को शासकीय अस्पताल अमलीपदर ले जाया गया, जहां से उन्हें देवभोग रेफर किया गया। इसके बाद उपचार के लिए आगे ले जाने के दौरान जन्माष्टमी के दिन उनकी मौत हो गई। परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया और अंतिम संस्कार कर दिया। ऐसे में मौत के चिकित्सकीय कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
परिवार ने निजी क्लीनिक में दिए गए उपचार, दवाओं और इंजेक्शन की खुराक के साथ ही संबंधित चिकित्सक की योग्यता, मेडिकल पंजीयन तथा क्लीनिक संचालन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की मांग की है। मृतक अपने परिवार का कमाने वाला सदस्य था। परिवार में उसकी एक बेटी है, जबकि पत्नी गर्भवती बताई गई है।
मामले में संबंधित चिकित्सक डॉ. मनीष सिन्हा ने परिजनों के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने बुधवार को कहा कि उनकी ओर से किसी प्रकार का गलत उपचार नहीं किया गया और लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं।
गरियाबंद के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) यू.एस. नवरत्ने ने आज बताया कि मामले की जानकारी मिली है और शिकायत भी प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि जांच के लिए टीम गठित की जाएगी और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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