गरियाबंद , अक्टूबर 27 -- छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र करका में गर्डलिंग के कारण क्षतिग्रस्त करीब 3500 पेड़ों को बचाने के लिए वन विभाग ने विशेष अभियान शुरू किया है।

इस अभियान में कर्नाटक के प्रसिद्ध पर्यावरण संरक्षण कार्यकर्ता एवं 'ट्री डॉक्टर' के नाम से पहचाने जाने वाले विजय निशांत वन विभाग के साथ मिलकर प्राकृतिक पद्धतियों से पेड़ों का उपचार कर रहे हैं।

वन विभाग से मंगलवार को मिली जानकारी के अनुसार, करका वन क्षेत्र में बड़ी संख्या में पेड़ों को गर्डलिंग के जरिए नुकसान पहुंचाया गया है। इस प्रक्रिया में पेड़ के तने के चारों ओर की छाल को गहराई तक काट दिया जाता है, जिससे पेड़ के भीतर पोषक तत्वों का प्रवाह बाधित होने लगता है। इसके परिणामस्वरूप पेड़ धीरे-धीरे सूखने लगते हैं और समय पर उपचार नहीं मिलने की स्थिति में उनकी मृत्यु भी हो सकती है।

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरुण जैन ने बताया कि करका क्षेत्र में पिछले लगभग एक दशक के दौरान सवा लाख से अधिक पेड़ों के नष्ट होने के संकेत उपग्रह तस्वीरों के विश्लेषण से मिले हैं। उन्होंने बताया कि वन अधिकार पट्टे का लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से जमीन पर कब्जे की कोशिशों के दौरान पुराने एवं विशालकाय पेड़ों को नुकसान पहुंचाए जाने की आशंका है। वन विभाग ने फिलहाल गर्डलिंग से प्रभावित करीब 3500 पेड़ों की पहचान की है, जिनके संरक्षण एवं उपचार की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।

पेड़ों के उपचार में जुटे विजय निशांत ने वन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हुई क्षति को गंभीर पर्यावरणीय संकट बताया। उन्होंने कहा कि जंगलों में इस प्रकार पेड़ों को नुकसान पहुंचाया जाना चिंताजनक है। यदि वनों का विनाश इसी तरह जारी रहा तो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों का गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।

निशांत ने कहा कि उनका प्रयास अधिक से अधिक प्रभावित पेड़ों को बचाने का है। गर्डलिंग से क्षतिग्रस्त पेड़ों को समय रहते उचित उपचार और नियमित देखभाल मिलने पर उनके बचने की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि, उपचार की सफलता पेड़ों की वर्तमान स्थिति और उन्हें पहुंची क्षति की गंभीरता पर निर्भर करेगी।

इस अभियान की एक महत्वपूर्ण विशेषता स्थानीय वनकर्मियों को पेड़ों के उपचार का प्रशिक्षण देना भी है। वन विभाग के सेवानिवृत्त अनुविभागीय अधिकारी गोपाल सिंह राजपूत ने बताया कि विजय निशांत वन विभाग की टीम के लगभग 50 सदस्यों को गर्डलिंग से प्रभावित पेड़ों की पहचान, उपचार और संरक्षण की तकनीकों का प्रशिक्षण दे रहे हैं।

उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य वनकर्मियों को इस कार्य में दक्ष बनाना है, ताकि विशेषज्ञों की अनुपस्थिति में भी प्रभावित पेड़ों का उपचार और नियमित निगरानी जारी रखी जा सके। इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं से प्रभावित पेड़ों को बचाने में भी सहायता मिलेगी।

वन संरक्षण की दिशा में इस पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ही वन क्षेत्र में हजारों गर्डलिंग प्रभावित पेड़ों का सामूहिक उपचार देश में अपनी तरह के बड़े प्रयासों में से एक बताया जा रहा है। हालांकि, अभियान की वास्तविक सफलता उपचार के बाद पेड़ों की स्थिति और उनके पुनर्जीवित होने की दर पर निर्भर करेगी।

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