पटना , अक्टूबर 05 -- न्ना उद्योग विभाग की ओर से संचालित गन्ना प्रौद्योगिकी विस्तार कार्यक्रम वित्तीय वर्ष 2026-27 के तहत किसानों को आधुनिक गन्ना खेती की तकनीक से अवगत कराने के उद्देश्य से 40 किसानों का दल राज्य से बाहर प्रशिक्षण एवं एक्सपोजर विजिट के लिए रवाना हुआ। तिरुपति चीनी मिल, हरिनगर चीनी मिल एवं लौरिया चीनी मिल के क्षेत्रों से चयनित कुल 40 किसानों का समूह भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ में आयोजित प्रशिक्षण एवं एक्सपोजर विजिट में भाग लेगा। किसानों को गन्ने की उन्नत खेती, आधुनिक कृषि तकनीक, बेहतर उत्पादन तथा खेती में नई तकनीकों के उपयोग के संबंध में विशेषज्ञों द्वारा जानकारी दी जाएगी।

किसानों को नवीनतम गन्ना उत्पादन तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान उपलब्ध कराने और उन्हें आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने के उद्देश्य से यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान किसान गन्ने की उन्नत प्रजातियों, वैज्ञानिक खेती, फसल प्रबंधन तथा उत्पादन बढ़ाने से जुड़ी तकनीकों की जानकारी प्राप्त करेंगे। बीते रविवार को सहायक निदेशक ईख विकास, बगहा अभय कुमार शर्मा एवं सहायक महाप्रबंधक गन्ना एनपी सिंह ने ट्रेन के माध्यम से किसानों के दल को लखनऊ के लिए रवाना किया।

इस अवसर पर अधिकारियों ने किसानों को प्रशिक्षण का अधिक से अधिक लाभ उठाने तथा प्रशिक्षण में प्राप्त तकनीकी जानकारी को अपने खेतों में अपनाने के लिए प्रेरित किया। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण एवं एक्सपोजर विजिट से किसानों को आधुनिक गन्ना उत्पादन की तकनीकों की जानकारी मिलेगी और वे बेहतर कृषि प्रबंधन के माध्यम से गन्ने की उत्पादकता एवं गुणवत्ता में सुधार कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार राज्य में 25 नई चीनी मिलों को स्थापित करने की कवायद में जुटी है। इसमें दो चीनी मिलों रयैम (दरभंगा) और सकरी (मधुबनी) को स्थापित करने को लेकर अलग-अलग निजी कंपनियों के साथ एमओयू (समझौता पत्र) पर हस्ताक्षर हो चुका है। शेष कंपनियों को स्थापित करने के लिए भी प्रयास शुरू हो गए हैं। इसके अलावा वर्तमान में 10 चीनी मिलें पूरी तरह कार्यरत हैं और ये सुचारू हालत में हैं। इसके मद्देनजर चीनी मिलों को गन्ना की निरंतर सप्लाई जारी रखने के लिए गन्ना उत्पादन किसानों को उचित और आधुनिक ट्रेनिंग दी जा रही है। ताकि गन्ना का अधिक से अधिक उत्पादन हो सके और चीनी मिलों को पेराई के लिए गन्ना की कमी नहीं हो।

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