देवबंद (सहारनपुर) , सितंबर 19 -- भारतीय किसान यूनियन वर्मा एवं पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा ने प्रदेश सरकार से गन्ना पेराई सत्र शुरू होने से पहले गन्ने का लाभकारी मूल्य 700 रुपये प्रति कुंतल घोषित करने तथा चीनी मिलों पर बकाया गन्ना भुगतान का ब्याज किसानों को तत्काल दिलाने की मांग की है।
श्री वर्मा ने शनिवार को देवबंद सहकारी गन्ना समिति लिमिटेड के सामान्य निकाय की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि गन्ना संरक्षण के तहत समिति के सदस्यों की ओर से दिए गए प्रस्तावों को लिखित रूप में तैयार कर गन्ना समिति प्रबंधन तंत्र के माध्यम से लखनऊ स्थित गन्ना आयुक्त से स्वीकृत कराया जाए।
उन्होंने कहा कि गन्ने की उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है और चीनी के दाम भी बढ़े हैं। किसानों की बढ़ती लागत और चीनी के मूल्य को देखते हुए सरकार को चीनी मिलों के संचालन से पहले गन्ने का लाभकारी मूल्य 700 रुपये प्रति कुंतल घोषित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि गन्ना उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
श्री वर्मा ने दावा किया कि गन्ने से प्रदेश सरकार को प्रतिवर्ष करीब 60 हजार करोड़ रुपये का आबकारी शुल्क के रूप में राजस्व प्राप्त होता है। उन्होंने मांग की कि इसमें से 100 रुपये प्रति कुंतल की राशि प्रदेश के गन्ना किसानों के खातों में सीधे भेजी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि शुगरकेन कंट्रोल ऑर्डर, 1966 के अनुसार 14 दिन के भीतर गन्ने का भुगतान नहीं करने वाली चीनी मिलों को किसानों को 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्षों में विलंबित गन्ना भुगतान पर ब्याज दिलाने के संबंध में इलाहाबाद उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के आदेशों के बावजूद किसानों को ब्याज का भुगतान नहीं कराया जा रहा है।
श्री वर्मा ने कहा कि चीनी मिलों पर गन्ना भुगतान और ब्याज बकाया होने की स्थिति में किसानों से ढुलाई किराया काटने का भी कोई अधिकार नहीं होना चाहिए। उन्होंने एक कुंतल गन्ने पर एक किलोग्राम की कटौती बंद करने तथा गन्ना समितियों में कृषि यंत्रों के उपयोग पर किसानों से किराया नहीं लेने का प्रस्ताव भी रखा।
उन्होंने चीनी मिल मालिकों, गन्ना विभाग, सरकार और प्रशासन को चेतावनी दी कि चीनी मिलों के कांटों पर घटतौली पाए जाने पर किसान इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने घटतौली में लिप्त गन्ना विभाग के अधिकारियों और चीनी मिल प्रबंधन के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की। श्री वर्मा ने किसानों से जाति, बिरादरी, पार्टी, दल और धर्म से ऊपर उठकर अपनी समस्याओं के समाधान के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया।
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