नयी दिल्ली , जुलाई 13 -- दिल्ली कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. नरेश कुमार ने राजधानी की बदहाली को लेकर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सोमवार को यह समझना मुश्किल हो गया है कि यहां की सड़कों में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़कें हैं।

डॉ. नरेश कुमार ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि 24 जून को दिल्ली के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने दावा किया था कि पीडब्ल्यूडी की सड़कों पर 3,400 से अधिक गड्ढे भर दिए गये हैं, लेकिन राजधानी की मौजूदा स्थिति इस दावे की पोल खोल रही है। यहां पर ऐसी सड़क ढूंढना, जिस पर गड्ढे न हों, अपने आप में एक आश्चर्य की बात है।

उन्होंने कहा कि वह खुद हाल ही में नजफगढ़ से मित्राऊ गाँव तक लगभग पाँच किलोमीटर के मार्ग से होकर गुजरे, जहां पूरी सड़क पर सैकड़ों गड्ढे दिखाई दिये। उन्होंने कहा कि हजारों करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद पीडब्ल्यूडी की सड़कों की हालत बेहद खराब है, जिससे आम नागरिकों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार समय-समय पर सड़कों की मरम्मत और सुधार के बड़े-बड़े दावे करती रही है। नौ अप्रैल 2025 को सरकार ने 600 किलोमीटर सड़कों की मरम्मत की घोषणा की थी। इसके बाद 17 नवंबर 2025 को 500 किलोमीटर सड़कों की मरम्मत पूरी होने का दावा किया गया, जिस पर 803 करोड़ रुपये खर्च होने की बात कही गयी। वहीं 24 जून 2026 को 271 किलोमीटर सड़कों की मरम्मत पर 658 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का दावा किया गया। इसके बावजूद राजधानी में पीडब्ल्यूडी के नियंत्रण में आने वाली सड़कें आज भी गड्ढों से भरी हुई हैं।

डॉ. नरेश कुमार ने कहा कि दिल्ली में पीडब्ल्यूडी के अधीन लगभग 1,400 किलोमीटर सड़कें हैं और इन सड़कों तथा पीडब्ल्यूडी के पुलों के रखरखाव तथा विकास के लिए करीब 15 हजार करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान है। इसके बावजूद सड़कों की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। गड्ढों के कारण आए दिन सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं, विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालकों और बुजुर्गों की जान-माल पर खतरा बना रहता है। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित बड़ी संख्या में पीसीआर कॉल दर्ज होती हैं, जो व्यवस्था की विफलता को दर्शाती हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और दिल्ली सरकार के सारे कार्य केवल सोशल मीडिया पर प्रचार और बड़े-बड़े विज्ञापनों तक सीमित हैं। जमीनी स्तर पर सड़कों की स्थिति में कोई सुधार दिखाई नहीं देता।

उन्होंने कहा कि दिल्ली की प्रत्येक पीडब्ल्यूडी सड़क का स्वतंत्र रूस से तकनीकी ऑडिट कराया जाए, उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए तथा निर्माण और रखरखाव में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

उन्होंने सवाल किया कि दिल्ली की जनता यह जानना चाहती है कि सड़कों पर खर्च होने वाला सार्वजनिक धन आखिर कहां जा रहा है। राजधानी के लोगों को दावों और विज्ञापनों की नहीं, बल्कि गड्ढा-मुक्त और सुरक्षित सड़कों की आवश्यकता है।

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