लुधियाना , अगस्त 11 -- गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (गडवासु), लुधियाना की प्रोफेसर डॉ गुरप्रीत कौर ने श्रीलंका की यूनिवर्सिटी ऑफ पेराडेनिया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में अंतरराष्ट्रीय संसाधन विशेषज्ञ के रूप में हिस्सा लिया।
'नेग्लेक्टेड ट्रॉपिकल डिजीजेज: मॉलिक्यूलर डायग्नोसिस, कंपेरेटिव जीनोमिक्स एंड फाइलोजेनेटिक्स' विषय पर आयोजित इस कार्यशाला का आयोजन यूनिवर्सिटी ऑफ पेराडेनिया के फैकल्टी ऑफ वेटरिनरी मेडिसिन एंड एनिमल साइंस के डिपार्टमेंट ऑफ वेटरिनरी पैथोबायोलॉजी ने इंटरनेशनल सेंटर फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग एंड बायोटेक्नोलॉजी के सहयोग से किया।
डॉ. गुरप्रीत कौर ने ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड के प्रोफेसर मैल्कम जोन्स, अमेरिका की लुइसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर उडेनी बी. आर. बालासूरिया, तथा ऑस्ट्रिया की यूनिवर्सिटी ऑफ वेटरिनरी मेडिसिन, वियना के डॉ हंस-पीटर फ्यूहरर और अन्य अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ संसाधन विशेषज्ञ के रूप में वैज्ञानिक कार्यक्रम में योगदान दिया।
उन्होंने 'टेट्रा-प्राइमर एआरएमएस पीसीआर तकनीक फॉर कैप्चरिंग म्यूटेशंस' विषय पर सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों सत्र आयोजित किए। कार्यशाला में मलेशिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश, भारत और श्रीलंका सहित विभिन्न देशों से करीब 70 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
विश्वविद्यालय द्वारा मंगलवार को यहां जारी बयान के अनुसार, प्रतिभागियों और आयोजकों ने डॉ गुरप्रीत कौर के व्याख्यान और व्यावहारिक प्रदर्शन की सराहना की। कार्यशाला के दौरान आणविक निदान, डायग्नोस्टिक मोटिफ्स, फाइलोजेनेटिक एवं विकासवादी विश्लेषण में हुई प्रगति पर वैज्ञानिक चर्चा के साथ प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।
विश्वविद्यालय ने कहा कि कार्यशाला ने विभिन्न देशों के वैज्ञानिकों के बीच भविष्य में अनुसंधान सहयोग की संभावनाओं को मजबूत करने का अवसर भी प्रदान किया।
गडवासु के कुलपति डॉ जतिंदर पाल सिंह गिल ने उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों और उनके जूनोटिक महत्व को देखते हुए डॉ. गुरप्रीत कौर तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों को बधाई दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह के अकादमिक आदान-प्रदान से दोनों विश्वविद्यालयों के बीच भविष्य में अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। वेटरिनरी साइंस कॉलेज के डीन डॉ. स्वर्ण सिंह रंधावा ने भी डॉ. गुरप्रीत कौर को अंतरराष्ट्रीय मंच पर विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करने और वैज्ञानिक योगदान के लिए बधाई दी।
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