नागपुर , जुलाई 11 -- सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सतत, लचीली, समावेशी और भविष्योन्मुखी परिवहन व्यवस्था के निर्माण के लिए ब्रिक्स देशों के बीच मजबूत सहयोग का आह्वान करते हुए शनिवार को कहा कि ब्रिक्स की शक्ति नवाचार, साझेदारी तथा साझा जिम्मेदारी के माध्यम से वैश्विक परिवहन के भविष्य को आकार देने का अनूठा अवसर प्रदान करती है।

श्री गडकरी ने ब्रिक्स देशों के परिवहन मंत्रियों की यहां आयोजित तीसरी बैठक का उद्घाटन करते हुए कहा कि यह बैठक उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच परिवहन सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का विषय 'बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी' है, जो 'वसुधैव कुटुम्बकम्' और 'मानवता सर्वोपरि' की भावना से प्रेरित है।

उन्होंने कहा कि विश्व की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले ब्रिक्स देश स्वच्छ, सुरक्षित, स्मार्ट और अधिक दक्ष परिवहन प्रणालियों के विकास का नेतृत्व करने के साथ सतत आर्थिक विकास और क्षेत्रीय संपर्क को भी नयी गति दे सकते हैं। ब्रिक्स के सदस्य देशों में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब शामिल है।

परिवहन को आर्थिक विकास की रीढ़ बताते हुए श्री गडकरी ने कहा कि भारत ने दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क विकसित किया है तथा एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे और मल्टीमॉडल संपर्क का तेजी से विस्तार किया है। दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारा, सोनमर्ग सुरंग और 10 हजार किलोमीटर से अधिक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाएं आधुनिक अवसंरचना, पर्यावरणीय स्थिरता और तकनीकी नवाचार के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का उदाहरण हैं। उन्होंने हाइब्रिड एन्युटी मॉडल को अवसंरचना क्षेत्र में निजी निवेश आकर्षित करने का सफल माध्यम बताया।

उन्होंने कहा कि ब्रॉडगेज नेटवर्क के लगभग पूर्ण विद्युतीकरण, वंदे भारत ट्रेनों के विस्तार, मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना और नए पंबन पुल जैसी उपलब्धियों से रेलवे क्षेत्र में व्यापक आधुनिकीकरण हुआ है। मैरीटाइम अमृत काल विजन-2047, ई-नाविक और ई-समुद्र जैसी डिजिटल पहलों तथा ग्रीन शिपिंग कार्यक्रमों से समुद्री अवसंरचना और लॉजिस्टिक्स क्षमता को भी मजबूती मिली है।

श्री गडकरी ने कहा कि भारत हरित परिवहन के प्रति प्रतिबद्ध है। इलेक्ट्रिक बसों, ग्रीन अर्बन मोबिलिटी योजना, उड़ान योजना और पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान जैसी पहलों ने एकीकृत मल्टीमॉडल अवसंरचना विकास को गति दी है, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत कम हुई है और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आयी है।

उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता भारत की परिवहन नीति के केंद्र में हैं। सड़क दुर्घटना पीड़ितों के नकद-रहित उपचार के लिए पीएम-राहत योजना तथा सड़क निर्माण में पुनर्चक्रित प्लास्टिक, नगरपालिका कचरा, फ्लाई ऐश, स्टील स्लैग, बांस के क्रैश बैरियर और पुराने टायरों के उपयोग जैसी पहलों को उन्होंने पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार अवसंरचना विकास के उदाहरण बताया।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अवसंरचना वित्तपोषण, यातायात जाम, उत्सर्जन, सड़क सुरक्षा और अंतिम छोर तक संपर्क जैसी साझा चुनौतियों के समाधान के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने हरित हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक परिवहन, वैकल्पिक ईंधन, डिजिटल परिवहन प्रणालियों और सतत मल्टीमॉडल अवसंरचना के क्षेत्र में ज्ञान साझा करने, क्षमता निर्माण, तकनीकी सहयोग और संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देने की भारत की प्रतिबद्धता दोहरायी।

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