श्रीगंगानगर , अक्टूबर 12 -- राजस्थान में श्रीगंगानगर की मिट्टी में जन्मे, पले और पढ़े पद्मभूषण जगजीतसिंह की पुण्यतिथि पर राष्ट्रीय कला मंदिर ने रविवार शाम-ए-ग़ज़ल कार्यक्रम का आयोजन किया।

कार्यक्रम में गायक रजब अली भारती ने जगजीत सिंह की प्रसिद्ध ग़ज़लों, नज़्मों और पंजाबी गीतों की लगातार डेढ़ घंटे तक प्रस्तुति दी। रजब अली भारती के दादा उस्ताद जमाल ख़ां से जगजीतसिंह ने श्रीगंगानगर में करीब सात वर्ष तक बचपन और किशोरावस्था में गीत संगीत की शुरुआती तालीम प्राप्त की थी।

रजब अली भारती ने बिना किसी व्यवधान के एक के बाद एक ग़ज़लें सुनाईं। इनमें शामिल थीं, तुमको देखा तो ये ख्याल आया, हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी, होठों से छू लो तुम, होशवालों को खबर क्या, तेरी खुशबू में बसे खत, ये दौलत भी ले लो, कल चौदहवीं की रात थी, सरकती जाए है, रुख से नकाब, हम तो हैं परदेस में, प्यार का पहला खत, झुकी झुकी सी नज़र, तुम नहीं ग़म नहीं, कौन कहता है मोहब्बत की ज़ुबान, मैं चाहता भी यही था, चिट्ठी ना कोई संदेश, आपको देखकर देखता रह गया, कोई फरियाद तेरे दिल, नित खैर मंगा, चुले अग्ग न घड़े दे विच पाणी, ताई दिन न जवानी नाल और बात निकलेगी तो फिर। इन प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को जगजीतसिंह की यादों में डुबो दिया।

राष्ट्रीय कला मंदिर का जगजीतसिंह से पुराना नाता रहा है। किशोरावस्था में उनकी गायन प्रतिभा को सबसे पहले इसी संस्था ने पहचाना और प्रोत्साहित किया था। इसी संबंध में संस्थान हर वर्ष उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित करता है।

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