महराजगंज , सितंबर 27 -- नेपाल और महराजगंज में हो रही मूसलाधार बारिश से जिले की नदियों और नालों के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। वाल्मीकिनगर बैराज से गंडक नदी में 4.04 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद तटीय इलाकों में जलभराव और तटबंधों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। हालांकि राहत की बात यह है कि जिले के सभी तटबंध फिलहाल सुरक्षित हैं।
सिंचाई खंड-2 बाढ़ नियंत्रण कक्ष की रविवार सुबह जारी रिपोर्ट के अनुसार वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बैराज से 4,04,000 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है। भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने से गंडक के आसपास के तटीय क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
जिले में अब तक कुल 1,047 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जा चुकी है। लगातार बारिश और पहाड़ी नालों से आ रहे पानी के कारण चंदन नदी 101.50 मीटर और प्यास नदी 102.50 मीटर के स्तर पर पहुंचकर खतरे के निशान को पार कर गई हैं।
महाव नाला भी खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रहा है। इसका डेंजर लेवल पांच फीट निर्धारित है, जबकि रविवार को यह 11 फीट छह इंच के स्तर पर बह रहा था। जलस्तर बढ़ने से नाले के आसपास के क्षेत्रों में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है।
रोहिन नदी के जलस्तर में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। त्रिमुहानी घाट पर इसका जलस्तर 81.22 मीटर और भोरहाबारी घाट पर 77.15 मीटर दर्ज किया गया। रतनपुर बैराज से 17,620 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया है।
उधर, राप्ती नदी का जलस्तर भी बढ़कर रेगौली में 78.91 मीटर पहुंच गया है। नदियों और नालों में तेजी से हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए सिंचाई विभाग और बाढ़ नियंत्रण से जुड़े अधिकारियों को तटबंधों की लगातार निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
अधिशासी अभियंता सिंचाई खंड-2 राजीव कपिल ने बताया कि महराजगंज जिले और नेपाल सीमा से लगे सभी तटबंध पूरी तरह सुरक्षित हैं। तटबंधों की निगरानी के लिए गश्ती टीमों को 24 घंटे मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं।
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