हरिद्वार , अप्रैल 28 -- उत्तराखंड के हरिद्वार में मां गंगा की स्वच्छता और निर्मलता बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। मंगलवार को जिला गंगा संरक्षण समिति की 72वीं बैठक में जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने स्पष्ट किया कि किसी भी हालत में नालों और गंदे स्रोतों का पानी गंगा नदी में नहीं जाना चाहिए।

जिला कार्यालय सभागार में आयोजित बैठक में उन्होंने जल संस्थान और संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि गंगा किनारे स्थित क्षेत्रों का नियमित निरीक्षण कर प्रदूषण के स्रोतों को तत्काल बंद किया जाए। उन्होंने कहा कि गंगा की पवित्रता बनाए रखने के लिए स्थानीय नागरिकों और तीर्थयात्रियों द्वारा कूड़ा-कचरा एवं कपड़े नदी में फेंकने पर सख्ती से रोक लगाई जाए।

नगर निगम को सभी घाटों पर चेतावनी साइन बोर्ड लगाने और व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को जागरूक करने पर भी जोर दिया गया।

जिलाधिकारी ने हरकी पौड़ी क्षेत्र में अतिक्रमण पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि घाटों और पुलों पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही क्षेत्र में सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक में क्षतिग्रस्त घाटों के जीर्णोद्धार को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि जिन घाटों की मरम्मत नहीं हो पा रही है, उनके सुधार के लिए स्वयंसेवी संस्थाएं, सामाजिक संगठन, कंपनियां अथवा इच्छुक व्यक्ति जिला प्रशासन से संपर्क कर सहयोग कर सकते हैं।

इसके अलावा, जिन पुलों पर सुरक्षा के लिए जाली लगाने का कार्य प्रस्तावित है, उसे शीघ्र पूरा करने के निर्देश भी संबंधित अधिकारियों को दिए गए।

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