वाराणसी , मई 26 -- ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा का पावन पर्व धार्मिक नगरी काशी में धूमधाम से मनाया जा रहा है। गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दशाश्वमेध, अस्सी, दरभंगा, अहिल्याबाई, भदैनी, तुलसी, पांडेय, राणा महल, शिवाला समेत अन्य घाटों पर उमड़ रही है।
इस पावन पर्व पर अहिल्याबाई घाट पर शहर दक्षिण विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी के नेतृत्व में शास्त्रार्थ महाविद्यालय के 51 बटुकों द्वारा मां गंगा का दुग्धाभिषेक किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में विप्र समाज, काशी के अध्यक्ष डॉ. पवन शुक्ला के संयोजन में वैदिक आचार्य पंडित उदित नारायण मिश्रा के आचार्यत्व में बटुक ब्राह्मणों ने षोडशोपचार पूजन किया। इसमें गंधाक्षत, पुष्प और केसर का प्रयोग किया गया। नैवेद्य तथा फल इत्यादि चढ़ाने के बाद 51 लीटर दूध से अभिषेक किया गया। इस दौरान पूरा घाट वैदिक मंत्रों से गूंजायमान रहा।
डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि हिंदू धर्म में गंगा दशहरा (गंगावतरण) का अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महत्व है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व मां गंगा के स्वर्ग से धरती पर अवतरण की स्मृति में मनाया जाता है। इस दिन गंगा नदी में स्नान और दान-पुण्य करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है।
उन्होंने बताया कि पौराणिक कथा के अनुसार, राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों की मुक्ति और उद्धार के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी प्रार्थना पर प्रसन्न होकर मां गंगा धरती पर अवतरित हुई थीं। आज आवश्यक है कि समाज के उत्थान के लिए लोगों को भगीरथ प्रयास से सदैव प्रेरणा लेनी चाहिए।
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