लखनऊ , अप्रैल 28 -- मेरठ से प्रयागराज तक प्रस्तावित लगभग 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेस-वे के साथ उत्तर प्रदेश की औद्योगिक तस्वीर बदलने की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार ने इस मार्ग से जुड़े 12 जिलों में 11 औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करने की योजना बनाई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योग, लॉजिस्टिक्स और कृषि आधारित कारोबार को नई गति मिलेगी। इन औद्योगिक कॉरिडोरों का विकास मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जिलों में किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना, किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना और छोटे कस्बों को औद्योगिक विकास से जोड़ना है।
मेरठ जिले में, जहां से गंगा एक्सप्रेस-वे की शुरुआत होती है, किठौर, माछरा और सरधना क्षेत्र के आसपास छोटे उद्योग, वेयरहाउसिंग और ट्रांसपोर्ट हब विकसित किए जाने की योजना है। इससे यह क्षेत्र औद्योगिक गतिविधियों का नया केंद्र बन सकता है। हापुड़ और बुलंदशहर के सिकंदराबाद, स्याना और गुलावठी जैसे क्षेत्रों में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, फूड प्रोसेसिंग और लॉजिस्टिक पार्क स्थापित किए जाने की संभावना है। दिल्ली-एनसीआर की निकटता इन जिलों में निवेश को और आकर्षक बना रही है। अमरोहा और संभल के धनौरा, असमोली और चंदौसी क्षेत्रों में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिया जाएगा। यहां फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और कोल्ड स्टोरेज चेन विकसित होने से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।
बदायूं और शाहजहांपुर के दातागंज, बिसौली, जलालाबाद और तिलहर जैसे क्षेत्रों में लॉजिस्टिक पार्क, ट्रक टर्मिनल और वेयरहाउसिंग हब विकसित किए जाने की योजना है, जिससे माल परिवहन और सप्लाई चेन मजबूत होगी। हरदोई और उन्नाव के संडीला, बांगरमऊ और सफीपुर क्षेत्रों में छोटे उद्योगों के साथ टेक्सटाइल और कृषि आधारित यूनिट्स की संभावना देखी जा रही है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार बढ़ेगा और पलायन कम हो सकता है। रायबरेली और प्रतापगढ़ के लालगंज, कुंडा और पट्टी क्षेत्रों में डेयरी, फूड प्रोसेसिंग और कृषि आधारित उद्योगों के साथ लॉजिस्टिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी होगी।
प्रयागराज जिले में हंडिया और फूलपुर के आसपास औद्योगिक और लॉजिस्टिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र विकसित करने की योजना है, जिससे पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार तक माल परिवहन और अधिक सुगम होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा एक्सप्रेस-वे के साथ प्रस्तावित ये औद्योगिक कॉरिडोर विकास को केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहने देंगे, बल्कि गांवों और छोटे कस्बों तक पहुंचाएंगे। सड़क, उद्योग, वेयरहाउस और लॉजिस्टिक पार्क के संयुक्त विकास से स्थानीय स्तर पर व्यापार, परिवहन, होटल, ढाबे और अन्य सेवाओं का भी तेजी से विस्तार होगा।
गंगा एक्सप्रेस-वे और उससे जुड़े औद्योगिक कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों को आर्थिक शक्ति केंद्र में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।
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