मुरादाबाद , जून 11 -- गंगा एक्सप्रेसवे पर अमरोहा-संभल सीमा के निकट हुए भीषण सड़क हादसे में तीन लोगों की मौत और आठ अन्य के घायल होने की घटना के बाद एक्सप्रेसवे की सुरक्षा व्यवस्थाओं और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक एक्सप्रेसवे केवल बेहतर सड़क निर्माण तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों और प्रभावी आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली से भी लैस किया जाना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि बुधवार को जम्मू-कश्मीर से लौट रहे लखनऊ निवासी एक परिवार की स्कॉर्पियो गंगा एक्सप्रेसवे पर अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई थी। इस दुर्घटना में लखनऊ के नखासा क्षेत्र निवासी चमड़ा कारोबारी अबूबकर (40), हिना (28) और जुनैरा (15) की मृत्यु हो गई थी, जबकि आठ अन्य घायल हो गए थे। प्रारंभिक जांच में चालक को झपकी आना दुर्घटना का संभावित कारण माना जा रहा है।

इस हादसे के बाद सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों ने लंबी दूरी के एक्सप्रेसवे पर चालकों की थकान को कम करने के लिए नियमित अंतराल पर अत्याधुनिक विश्राम स्थलों की स्थापना की आवश्यकता बताई है। उनका कहना है कि लगातार वाहन चलाने से चालक की सतर्कता प्रभावित होती है, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए प्रत्येक 40 से 50 किलोमीटर पर सुविधायुक्त रेस्ट एरिया विकसित किए जाने चाहिए।

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि एक्सप्रेसवे पर गति सीमा का निर्धारण पर्याप्त नहीं है। निर्धारित गति सीमा के प्रभावी अनुपालन के लिए इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, स्वचालित निगरानी कैमरे और नियमित पेट्रोलिंग व्यवस्था को और सुदृढ़ किए जाने की आवश्यकता है।

सड़क सुरक्षा से जुड़े जानकारों ने एक्सप्रेसवे पर रिफ्लेक्टिव साइन बोर्ड, चेतावनी संकेतक, ब्लिंकर्स तथा रंबल स्ट्रिप्स की नियमित समीक्षा की आवश्यकता पर बल दिया है। साथ ही, आवारा पशुओं की आवाजाही रोकने के लिए मजबूत फेंसिंग और संवेदनशील स्थानों की पहचान कर विशेष सुरक्षा उपाय अपनाने की भी जरूरत बताई गई है।

हादसे के बाद चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि गंभीर दुर्घटनाओं में 'गोल्डन ऑवर' अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में एक्सप्रेसवे के निकट पर्याप्त संख्या में एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस तथा आधुनिक ट्रॉमा सेंटर की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि घायलों को समय पर विशेषज्ञ उपचार मिल सके।

स्थानीय नागरिकों ने भी एक्सप्रेसवे पर आपातकालीन सहायता प्रणाली को और प्रभावी बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि दुर्घटना की स्थिति में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य के लिए स्पष्ट और सशक्त तंत्र विकसित किया जाना चाहिए। हालांकि, संबंधित एजेंसियों द्वारा समय-समय पर सुरक्षा उपायों की समीक्षा किए जाने का दावा किया जाता रहा है, लेकिन हाल की घटनाओं ने सुरक्षा ऑडिट की प्रभावशीलता पर भी प्रश्नचिह्न खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का मत है कि प्रत्येक गंभीर दुर्घटना के बाद स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकन कराया जाना चाहिए, ताकि दुर्घटनाओं के कारणों की पहचान कर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

गंगा एक्सप्रेसवे को प्रदेश की महत्वपूर्ण आधारभूत परियोजनाओं में शामिल किया जाता है। ऐसे में यातायात विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी उपयोगिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सुरक्षा मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता देना आवश्यक है। उनका कहना है कि बेहतर सड़कों के साथ-साथ बेहतर सुरक्षा व्यवस्था और त्वरित चिकित्सा सहायता ही किसी भी एक्सप्रेसवे को वास्तव में सुरक्षित बना सकती है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, हालिया दुर्घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और उपलब्ध सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की जा सकती है। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए गए तो भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की संख्या में कमी लाई जा सकती है।

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