श्रीगंगानगर , मार्च 06 -- राजस्थान में श्रीगंगानगर जिले में गंगनहर पर पानी चोरी का बड़ा मामला सामने आया है।

शिवपुर हेड से डाउनस्ट्रीम की ओर नहर की पटरी में छह इंच व्यास की तीन पाइपें दबाकर करीब 15 किलोमीटर तक अवैध रूप से पानी की आपूर्ति की जा रही थी।

सूत्रों ने बताया कि चोरी की सूचना देने वाले किसान संजयकुमार बिश्नोई के खिलाफ ही सिंचाई विभाग ने मामला दर्ज करा दिया है।

गंगनहर परियोजना के निर्वाचित अध्यक्ष हरविंदर सिंह गिल, ग्रामीण किसान मजदूर समिति (जीकेएस) के प्रदेश अध्यक्ष रणजीत सिंह राजू और जिलाध्यक्ष रामकुमार सहारण ने शुक्रवार को प्रभावित किसानों के साथ जिला मुख्यालय पहुंचकर इस मामले में प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने निर्दोष किसान का नाम प्राथमिकी से हटाने, असली दोषियों पर सख्त कार्रवाई और सिंचाई विभाग की जमीन पर बने अवैध पानी चोरी के ढांचे को तुरंत तोड़ने की मांग की है। सूत्रों ने बताया कि बारांवाली गांव के काश्तकारों ने परियोजना अध्यक्ष हरविंदरसिंह गिल को फोन पर सूचना दी कि शिवपुर से साधुवाली तक गंगनहर के किनारे बन रही डामर सड़क के नीचे पानी चोरी के लिए पाइपें दबाई जा रही हैं। इस सूचना को जीकेएस नेताओं रणजीतसिंह राजू और राकेश जांगू को भी तुरंत दी गई। इसके बाद सभी ने मिलकर जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता धीरज चावला को लिखित सूचना दे दी।

सूत्रों ने बताया कि किसान संजयकुमार बिश्नोई ने इससे पहले जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत भी की थी कि नहर के साथ पाइप लाइन डाली जा रही है और चैंबर बनाया गया है, लेकिन विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब जब विभाग की टीम ने जेसीबी चलाकर खुदाई की तो आरडी 16-17 के बीच तीन लोहे की 6 इंच व्यास की पाइपें दबी हुई मिलीं। इसके अलावा थोड़ा आगे एक अन्य पाइप लाइन भी चलती हुई पायी गयी। इन पाइपों से पानी चोरी करके पंजाब के गांव गुमजाल समेत 10-15 किलोमीटर तक आपूर्ति की जा रही थी।

जल संसाधन विभाग के कनिष्ठ अभियंता शोएब अली की शिकायत पर हिंदूमलकोट थाने में आरडी 17-18 के बीच संजय बिश्नोई के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया। आरोप लगाया गया कि नहर की पटरी खोदकर 25 फुट लंबी छह इंच व्यास की पाइपें लगायी गयी हैं।

जीकेएस और गंगनहर परियोजना के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि संजय बिश्नोई ने ही सबसे पहले पानी चोरी की सूचना दी थी। वास्तव में पाइपें उनकी कृषि भूमि में नहीं, बल्कि अन्य किसानों ने लगाई थीं। विभाग ने उसी निर्दोष किसान के खिलाफ मामला दर्ज करा दिया जबकि असली चोरों को बचा लिया गया है।

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