, Oct. 17 -- श्री सिन्हा ने बताया कि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री के मार्गदर्शन में बिहार में विगत एक जून से 30 जून तक 'खेत बचाओ अभियान' चलाया गया। इसके तहत राज्यभर में 7,275 किसान चौपालों का आयोजन कर 6,19,436 किसानों को जागरूक किया गया। उन्होंने कहा कि इस पहल से किसानों तक वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों की जानकारी पहुंचाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में उनकी भागीदारी बढ़ाने में मदद मिली है।

उन्होंने कहा कि आगामी 26 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक प्रस्तावित 'खेत बचाओ अभियान' को बिहार में व्यापक जनभागीदारी के साथ संचालित किया जाएगा। इसके तहत किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जल संरक्षण और पोषक तत्वों के सतत प्रबंधन के प्रति जागरूक किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि अभियान के माध्यम से किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय कर्मियों के बीच समन्वय मजबूत कर प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने का प्रयास किया जाएगा।

कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार सरकार कृषि वैज्ञानिकों, कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि प्रसार तंत्र के माध्यम से किसानों तक आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों की जानकारी पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का उद्देश्य ऐसी कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना है, जिनसे उत्पादन बढ़ने के साथ मिट्टी की उर्वरता, जल संसाधनों और पर्यावरण का संरक्षण भी सुनिश्चित हो सके।

श्री सिन्हा ने टिकाऊ कृषि के लिए जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, खेतों में नमी बनाए रखने, फसल विविधीकरण, फसल अवशेष प्रबंधन और दलहनी फसलों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन उपायों से मृदा स्वास्थ्य में सुधार, प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम करने और कृषि उत्पादन की स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

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