पटना , जून 20 -- ाज्य में एक जून से खेत बचाओं अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत अब तक राज्य के सभी 38 जिलों में तीन हजार से अधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इनमें दो लाख 16 हजार से अधिक किसानों ने भाग लिया है। 30 जून तक चलने वाले इस अभियान में किसानों को संतुलित उर्वरक के उपयोग, मिट्टी जांच और प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक लाने के लिए प्रयास किया जा रहा है। साथ ही 12 से 20 जून के बीच प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए 52 विशेष कार्यशालाओं का आयोजन किया गया है। इस अभियान का मुख्य फोकस 'कम खाद, सही खाद और सही सलाह' के सिद्धांत को हर खेत तक पहुंचाना है, जिससे रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग को रोका जा सके और खेती की लागत में कमी आए। माना जा रहा है कि इस अभियान से किसानों में जागरूकता आएगी और इससे जहां मृदा संरक्षण होगा वहीं किसानों की आय भी बढ़ेगी। साथ ही उर्वरकों के गैर जरूरी प्रयोग से मनुष्यों में बढ़ रही बीमारियों को रोकने में मदद मिलेगी।

अभियान के दौरान राज्यभर में मिट्टी की जांच पर विशेष बल दिया जा रहा है। किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर ही संतुलित उर्वरक डालने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही हरी खाद, जैविक खेती और बायो-प्रोडक्ट्स के उपयोग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जा रहा है। जलवायु परिवर्तन को देखते हुए कृषि वैज्ञानिक सीधे खेतों पर जाकर व्यावहारिक सलाह दे रहे हैं। कम पानी वाली फसलों, फसल विविधीकरण और जोखिम प्रबंधन के आधुनिक तरीकों की लाइव जानकारी दी जा रही है। पंचायत से राज्य स्तर तक व्यापक समन्वय स्थापित कर यह जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सांसदों, विधायकों, मुखिया और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से गांवों में चौपाल लगाकर इस अभियान को नेतृत्व प्रदान करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान कृषि विभाग के योजनाओं जैसे किसान क्रेडिट कार्ड और पीएम-किसान सम्मान निधि से वंचित रह गए पात्र किसानों को जोड़ने, राष्ट्रीय दलहन-तिलहन मिशन और कृषि यंत्रीकरण (मशीनरी) योजनाओं का लाभ सीधे गांव के स्तर पर सुलभ कराया जा रहा है।

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