बैतूल , मार्च 26 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के खेड़ी रामोसी प्रकरण में 32 आदिवासी परिवारों पर दर्ज प्रकरण के बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस मामले को लेकर आदिवासी कांग्रेस और कांग्रेस नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामु टेकाम, कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे तथा जिला कांग्रेस अध्यक्ष निलय डागा ने किया। नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार आदिवासियों के अधिकारों की अनदेखी कर रही है और उनकी जमीनों पर कब्जे के प्रयास किए जा रहे हैं।
ज्ञापन में कहा गया कि खेड़ी रामोसी गांव के 32 आदिवासियों पर गंभीर धाराओं में एक साथ मामला दर्ज किया जाना चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा पूरे गांव को निशाना बनाकर कार्रवाई की गई, जो न्यायसंगत नहीं है। नेताओं ने मांग की कि निष्पक्ष जांच पूरी होने तक किसी भी गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए।
इस दौरान पीड़ित परिवारों ने सर्किट हाउस में नेताओं से मुलाकात कर अपनी बात रखी। उनका कहना है कि वर्ष 1917 के राजस्व अभिलेखों में संबंधित भूमि उनके नाम दर्ज है, बावजूद इसके उन्हें बेदखल करने का प्रयास किया जा रहा है।
नेताओं ने राज्य सरकार पर आदिवासी विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पेसा कानून और वन अधिकार कानून का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। साथ ही वन विभाग पर भी आदिवासियों की जमीन पर कब्जे के आरोप लगाए गए।
पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे ने कहा कि आदिवासियों पर दबाव बनाया जा रहा है और विरोध करने पर प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली लोग आदिवासियों की जमीन खरीदने का प्रयास कर रहे हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने आदिवासी समाज के खिलाफ बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए प्रशासन से कानून-व्यवस्था मजबूत करने और आदिवासी क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही कुछ लोगों की भूमिका की जांच कर उचित कार्रवाई करने की भी मांग की गई।
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