जैसलमेर , फरवरी 08 -- राजस्थान में राज्य वृक्ष खेजड़ी को बचाने के लिए शुरू हुआ आंदोलन के दौरान अनशन पर बैठी दो महिलाओं की तबीयत बिगडने से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। पर्यावरण प्रेमी दिवंगत राधेश्याम पेमाणी (विश्नोई) की माता और पत्नी को जो पिछले तीन दिनों से अनशन पर थीं, रविवार को उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

राधेश्याम की मां रतनी देवी को जैसलमेर के प्रिया हॉस्पिटल में भर्ती किया गया है, जबकि पत्नी निरमा विश्नोई को पोकरण में प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। तीन फरवरी से दोनों महिलाएं खेजड़ी बचाओ आंदोलन के समर्थन में अन्न-जल त्याग कर बैठी थीं। हालांकि, संतों के हस्तक्षेप और आंदोलन को आगे बढ़ाने के रणनीतिक निर्णय के बाद उन्होंने अनशन समाप्त तो किया, लेकिन अचानक खान-पान शुरू करने से उनकी सेहत बिगड़ गई।

अस्पताल में भर्ती रतनी देवी ने कहा, "हमें अपनी जान की परवाह नहीं है। मेरे बेटे राधेश्याम ने वन्यजीवों को बचाते हुए अपनी जान दे दी, अगर हमें भी बलिदान देना पड़े तो गम नहीं। हमारी बस एक ही मांग है कि सरकार खेजड़ी को बचाने के लिए सख्त कानून बनाए। जब तक पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते, हमारा संघर्ष जारी रहेगा।"दिवंगत राधेश्याम विश्नोई पर्यावरण और वन्यजीव प्रेम के प्रतीक रहे हैं। सड़क हादसे में उनकी मृत्यु भी वन्यजीवों की रक्षा के प्रयास के दौरान ही हुई थी। अब उनका परिवार उसी मशाल को आगे लेकर चल रहा है। समाज और पर्यावरण प्रेमियों में इस घटना के बाद भारी आक्रोश है और सरकार से तुरंत दखल देने की मांग की जा रही है।

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