कसौली , अक्टूबर 25 -- हिमाचल प्रदेश के कसौली में तीन दिवसीय खुशवंत सिंह साहित्य महोत्सव (केएसएलएफ) 2026 का रविवार को सैन्य इतिहास, कला, उद्यमिता, पर्यावरण संबंधी चिंताओं और साहित्य पर हुई चर्चाओं के साथ समापन हुआ।

महोत्सव में लेखक, पत्रकार और चिंतकों ने अपने विचारों का आदान-प्रदान किया। लेखक प्रबल दासगुप्ता ने 'जनरल सुंदरजी: प्रशंसित या विवादित' विषय पर आयोजित एक प्रमुख सत्र में पत्रकार सुनेत्रा चौधरी के साथ बातचीत की।

श्री दासगुप्ता ने जनरल सुंदरजी को अपने समय से आगे की सोच रखने वाला रणनीतिकार बताया। उन्होंने कहा कि सुंदरजी की महत्वाकांक्षा, जल्दबाजी और तुरंत फैसले लेने की प्रवृत्ति के कारण कभी-कभी विवादित निर्णय भी लिए गए।

श्री दासगुप्ता ने 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' को एक बड़ी प्रशासनिक विफलता बताते हुए कहा कि जब सुंदरजी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से सीधे बात की, तो उस दौरान तय प्रोटोकॉल को दरकिनार कर दिया गया था। उन्होंने खुफिया विफलता और सुरक्षा बलों, नौकरशाही तथा राजनीतिक नेतृत्व के बीच तालमेल की कमी की ओर भी इशारा किया।

उन्होंने 'ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स' पर चर्चा करते हुए कहा कि पाकिस्तान की रक्षा क्षमताओं को परखने की सुंदरजी की कोशिश ने भारत को एक खतरनाक मोड़ पर ला खड़ा किया था। इस महोत्सव में प्रसिद्ध कलाकार सतीश गुजराल की जन्म शताब्दी भी मनाई गई, जिसमें अमन नाथ और फ़िरोज़ गुजराल के बीच बातचीत हुई।

इस सत्र में चित्रकला, मूर्तिकला, वास्तुकला और साहित्य के क्षेत्र में श्री गुजराल के योगदान पर चर्चा की गई। इसके साथ ही उनके व्यक्तित्व, निजी रिश्तों और उनके जीवन तथा कार्यों को दर्ज करने में खुशवंत सिंह की भूमिका पर भी बात हुई।

एक अन्य सत्र 'कॉरपोरेट योगी: फ्रॉम स्पीकर टू सीईओ' में पद्मश्री से सम्मानित डॉ. अरविंद लाल ने सेरेना जैकब से उन परिस्थितियों के बारे में बात की, जिनके कारण उन्हें 1977 में अपने पिता के निधन के बाद परिवार की प्रयोगशाला की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी। डॉ. लाल, जो उस समय पुणे के सशस्त्र सेनाओं में मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा विज्ञान में स्नात्कोत्तर की पढ़ाई कर रहे थे, दिल्ली लौट आए। उन्होंने 1949 में स्थापित उस प्रयोगशाला को संभाला और बाद में उसे 'डॉ. लाल पैथलैब्स' के रूप में विकसित किया। डॉ. लाल ने अपनी पुस्तक 'कॉरपोरेट योगी: माय जर्नी एज़ ए स्पिरिचुअल सीकर एंड एन एक्सीडेंटल एंटरप्रेन्योर' का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे निजी नुकसान, व्यावसायिक जिम्मेदारियों और आध्यात्मिक खोज ने उनके जीवन के सफर को आकार दिया।

'स्लो डाउन. यू मूव टू फास्ट' सत्र में पर्यावरण संबंधी चिंताओं और सचेत जीवनशैली पर चर्चा हुई, जिसमें श्रेया जानी और गार्गी रावत शामिल थीं। वंदना शिवा के साथ मिलकर लिखी अपनी किताब 'स्लो लिविंग: व्हाट यू कैन डू अबाउट क्लाइमेट चेंज' के संदर्भ में श्रेया जानी ने उपभोक्ता विकल्पों, विशेषाधिकारों और पर्यावरण के लिए नुकसानदेह जीवनशैली के प्रभावों पर बात की। उन्होंने नौ साल की उम्र से एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में अपने सफर को याद करते हुए, जिसके दौरान 13 साल की उम्र में ही वे अत्यधिक थकान का शिकार हो गई थीं, उन्होंने व्यक्तिगत सीमाओं को पहचानने और जीवन के प्रति अधिक सचेत दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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