पटना, मई 01 -- खुद को जनता का मजदूर कहने वाले बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुद्ध पूर्णिमा के दिन अपने पिछले दो दशकों पुराने निवास स्थल 01, अणे मार्ग को खाली कर दिया है।
श्री कुमार को बुद्ध और उनके स्थलों से बहुत लगाव है और डॉ.राममनोहर लोहिया के समाजवाद से प्रभावित होने की वजह से वह खुद को जनता का मजदूर ही कहते थे।
पूर्व मुख्यमंत्री श्री कुमार ने 2014-15 में जीतनराम मांझी के मुख्यमंत्री बनने के बाद करीब 09 महीनों के लिए यह बंगला छोड़ दिया था और 07, सर्कुलर रोड के बंगले में शिफ्ट हो गए थे। श्री मांझी उस पल का बयान बड़ी भावुकता से करते हैं। वह बताते हैं कि 2014 के लोकसभा चुनाव ने जनता दल यूनाइटेड (जदयू) की सीटें बहत घट गयी थीं और नीतीश कुमार ने उसकी जिम्मेदारी लेकर मुख्यमंत्री पद छोड़ने का फैसला लिया था। श्री मांझी ने बताया कि एक दिन श्री कुमार ने उन्हें अपने बंगले पर बुलाया और कहा कि आज से यह बंगला उनका हुआ। मांझी जी अवाक् रह गए और समझ नहीं पाए को नीतीश कुमार क्या कह रहे हैं। इसके बाद उन्हें बताया गया कि उनको मुख्यमंत्री का पद दिया जा रहा है।
जीतनराम मांझी के 09 महीनों को छोड़ दें तो नीतीश कुमार इसी बंगले में दो दशकों से अपनी राजनीति का संचालन कर रहे थे। इस दौरान कुल 10 बार उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन इस बंगाले से उनका साथ कभी नहीं छूटा।
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