दरभंगा , अगस्त 11 -- ेश की आजादी की लड़ाई के अमर शहीद और सबसे युवा क्रांतिकारियों में शामिल खुदीराम बोस की शहादत दिवस पर मंगलवार को जिला बार एसोसिएशन भवन, दरभंगा में अधिवक्ताओं ने उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया।अधिवक्ता रमणजी चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में अधिवक्ताओं ने अमर शहीद खुदीराम बोस के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया तथा स्वतंत्रता संग्राम में उनके अदम्य साहस और बलिदान को स्मरण किया।
इस अवसर पर अधिवक्ता अरुण कुमार चौधरी ने कहा कि खुदीराम बोस ने मात्र 18-19 वर्ष की आयु में देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शासन के विरुद्ध क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय बोस को बंगाल के क्रांतिकारियों पर कठोर कार्रवाई के लिए चर्चित ब्रिटिश जज डगलस किंग्सफोर्ड को निशाना बनाने के लिए मुजफ्फरपुर भेजा गया था।उन्होंने बताया कि 30 अप्रैल 1908 को मुजफ्फरपुर में खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी ने किंग्सफोर्ड की बग्घी समझकर उस पर बम फेंका था। हालांकि बग्घी में किंग्सफोर्ड के बजाय दो अंग्रेज महिलाएं सवार थीं, जिनकी इस घटना में मृत्यु हो गई थी। घटना के बाद खुदीराम बोस को गिरफ्तार कर मुकदमा चलाया गया और 11 अगस्त 1908 को मुजफ्फरपुर जेल में उन्हें फांसी दे दी गई।
श्री चौधरी ने कहा कि खुदीराम बोस का बलिदान देश के युवाओं के लिए साहस, देशभक्ति और राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है। उनका नाम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में सदैव अमर रहेगा।
कार्यक्रम में अधिवक्ता नरेश कुमार झा, महेश कुमार सिन्हा, प्रदीप यादव, संजीव कुमार, प्रमोद शंकर चौधरी, पंकज कुमार सिंह, कुलदीप दिवान, राजू पंडित, विनय कुमार झा, दीपक कुमार सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता, मुंशी एवं न्याय अतिथि उपस्थित थे।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित