बेंगलुरु , अप्रैल 29 -- कर्नाटक के बेंगलुरु में 'उमर खालिद एंड हिज़ वर्ल्ड' किताब के विमोचन के खिलाफ बुधवार को विरोध प्रदर्शन कर रहे भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया।

गौरतलब है कि उमर खालिद 2020 के दिल्ली दंगों के मामले में गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत एक मुख्य आरोपी है।

कर्नाटक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने किताब के विमोचन का विरोध करने पर भाजयुमो कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिये जाने के बाद प्रदेश सरकार की आलोचना करते हुए उस पर इस कार्यक्रम की अनुमति देकर 'तुष्टीकरण की हर सीमा पार करने' का आरोप लगाया।

विपक्ष के नेता आर. अशोका ने आरोप लगाया कि 'कर्नाटक में देशभक्ति को सज़ा दी जा रही है।'यह विवाद तब शुरू हुआ, जब पुलिस ने डोमलूर स्थित बेंगलुरु इंटरनेशनल सेंटर के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे भाजयुमो कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया; यहीं मंगलवार को किताब का लॉन्च कार्यक्रम आयोजित किया गया था।

अशोका ने राज्य सरकार पर राष्ट्रवादी आवाज़ों को दबाने और साथ ही उमर खालिद को वैधता प्रदान करने का आरोप लगाया। उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में विरोध प्रदर्शन और हिरासत में लिए जाने के दृश्यों को साझा करते हुए कहा, " कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने तुष्टीकरण की हर सीमा पार कर दी है। देश के लिए बोलिए और आपको निशाना बनाया जाएगा। विभाजनकारी नैरेटिव पर सवाल उठाइये और आपको चुप करा दिया जाएगा।"उन्होंने इन गिरफ्तारियों को 'लोकतंत्र का खतरनाक विकृतिकरण' बताया और आरोप लगाया कि कांग्रेस विवादित हस्तियों को संरक्षण देकर 'वोट-बैंक की राजनीति' कर रही है। श्री अशोका ने अपने हमले को और तेज़ करते हुए सवाल उठाया कि क्या कर्नाटक 'एक ऐसा राज्य बन गया है, जहां देशभक्ति को सज़ा दी जातीहै और उकसावे को संरक्षण दिया जाता है?'यह विरोध प्रदर्शन ठीक उसी समय हुआ जब किताब का विमोचन कार्यक्रम चल रहा था, जिसमें संपादक अनिर्बान भट्टाचार्य, बानोज्योत्सना लाहिड़ी और शुद्धब्रत सेनगुप्ता शामिल हुए थे।

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