पटना, सितंबर 10 -- ारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा)के राज्य सचिव रामनरेश पाण्डेय ने केंद्र सरकार से खाद के लिए फार्मर आईडी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की है।श्री पाण्डेय ने आज बयान जारी कर कहा कि पहले की तरह किसानों और बटाईदारों को निर्धारित मूल्य पर खाद आपूर्ति की गारंटी की जाये। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों की आमदनी दोगुनी करने के वायदे के साथ सत्ता में आये थे, लेकिन उनकी सरकार में किसानों की आमदनी दोगुनी नहीं हुई, लेकिन खेती की लागत काफी बढ़ गई है। यूरिया की 50 किलों की बोरी 45 किलों की हो गई। किसानों को खाद-बीज नहीं मिल रहा है। सात वर्षों में किसान सम्मान निधि की राशि नहीं बढ़ी है, लेकिन सरकार नया नया नियम लाकर किसानों को परेशान करने का कार्य कर रही है।

भाकपा राज्य सचिव रामनरेश पाण्डेय ने कहा कि बिहार में करीब दो करोड़ छोटे, मंझौले एवं बड़े किसान हैं। इनमें से करीब 87 लाख किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना की राशि मिल रही है। साथ ही करीब 54 लाख किसानों का ही फार्मर आईडी बना हुआ है। इसके बावजूद सरकार ने फार्मर आईडी वाले किसानों को ही खाद देने का निर्णय लिया है। यह फैसला किसान,बटाई दार और मजदूर विरोधी है,क्योंकि बिहार में बड़े पैमाने पर खेत मजदूर किसानों की जमीन पर बटाई दारी खेती करते हैं। बटाई दार को खाद नहीं मिलेगी तो खेती प्रभावित होगी।

श्री पाण्डेय ने कहा कि सरकार पहले ऑनलाइन रजिस्टर टू में सुधार करें। रजिस्टर टू में सभी किसानों की जमीन का प्लाट नम्बर, रकबा और जमाबंदी नम्बर चढ़ाया जाये, जिससे किसानों को फार्मर आईडी बनाने में मदद मिल सके। साथ ही सभी बटाईदारों का भी फार्मर आईडी बनाया जाए। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि जबतक सभी किसानों और बटाईदारों का फार्मर आईडी नहीं बन जाता है तब तक बिना किसी आईडी की किसानों और बटाईदारों को खाद की आपूर्ति निर्धारित मूल्य पर की जाए।

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