नई दिल्ली , जुलाई 16 -- भविष्य का खाद्य बाजार खाद्यान्न उत्पादन करने वालों का नहीं, बल्कि उनका मूल्य संवर्धन करने वालों का होगा। यह बात आंध्र प्रदेश सरकार के उद्योग, वाणिज्य एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री टी. जी. भरत ने गुरुवार को यहां 'फिक्की फूडवर्ल्ड इंडिया 2026' के 17वें संस्करण को संबोधित करते हुए कही।

श्री भरत ने कहा कि आज भारत का खाद्य उद्योग केवल खाद्य उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रौद्योगिकी, नवाचार, बुद्धिमत्ता, सतत विकास तथा किसानों, उपभोक्ताओं और उद्योगों के लिए समान रूप से मूल्य सृजन पर आधारित है। उन्होंने कहा, "जो देश अपनी खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करेंगे, वही अपना भविष्य भी सुरक्षित करेंगे। वैश्विक कंपनियाँ अब भारत को केवल एक बड़े बाजार के रूप में नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए विनिर्माण केंद्र के रूप में देख रही हैं।"आंध्र प्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए श्री भरत ने कहा कि आंध्र प्रदेश केवल एक कृषि प्रधान राज्य नहीं है, बल्कि वह भारत की खाद्य प्रसंस्करण राजधानी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि वैश्विक खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का आकार लगभग 8100 अरब डॉलर के बराबर है, जिसमें भारत की हिस्सेदारी लगभग 543 अरब डॉलर है। इसमें अकेले आंध्र प्रदेश का योगदान लगभग 49 अरब अमेरिकी डॉलर का है। उन्होंने कहा, "यदि भारत दुनिया को भोजन उपलब्ध कराना चाहता है, तो आंध्र प्रदेश उसे प्रसंस्कृत करने के लिए पूरी तरह तैयार है। कृषि तभी समृद्धि का माध्यम बनती है, जब किसानों के निकट ही कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन किया जाए।"केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण सचिव अविनाश जोशी ने कहा कि खाद्य सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। साथ ही, हमें अधिक स्वास्थ्यवर्धक विकल्पों को बढ़ावा देना होगा और खाद्य प्रसंस्करण की जिम्मेदार एवं टिकाऊ पद्धतियों को प्रोत्साहित करना होगा। उन्होंने कहा कि इससे यह क्षेत्र भविष्य में सतत विकास का अग्रदूत बन सकेगा।

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