जयपुर , मार्च 01 -- उत्तर पश्चिम रेलवे जयपुर मंडल के रींगस पर गत 21 से 28 फरवरी तक सीकर जिले के रींगस में आयोजित खाटूश्यामजी लक्खी मेले के दौरान 2.58 लाख यात्रियों ने रींगस रेलवे स्टेशन से यात्रा की तथा स्टेशन ने 3.40 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित किया।

उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी अमित सुदर्शन के अनुसार यह पिछले वर्ष के 2.71 करोड़ रुपए के राजस्व और 2.28 लाख यात्रियों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है और रेलवे प्रशासन द्वारा किए गए व्यापक और सुनियोजित इंतज़ामों के परिणामस्वरूप श्रद्धालुओं की सुरक्षित, सुगम एवं व्यवस्थित यात्रा सुनिश्चित की गई।

उल्लेखनीय है कि महाप्रबंधक से अमिताभ ने खाटूश्यामजी मेले में व्यवस्थाओं को लेकर उच्च स्तरीय बैठक में अधिकारियों को दिशा निर्देश प्रदान किये थे। मेले में ट्रेनों में आ रही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के मद्देनजर डीआरएम रवि जैन ने रींगस जंक्शन पर मोर्चा सम्भाला। यात्रियों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं हो।

श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के मद्देनजर मात्र दो महीनों में एक हजार यात्रियों की क्षमता वाला एक नया मेला शेल्टर तैयार किया गया। इस प्रकार कुल दो मेला शेल्टर उपलब्ध रहे जिनकी संयुक्त क्षमता दो हजार यात्रियों की थी। मेला शेल्टर को भीड़ की दिशा और मूवमेंट को ध्यान में रखते हुए विभाजित किया गया था, जिससे यात्रियों का आवागमन व्यवस्थित और सुरक्षित बना रहा।

मेले के दौरान सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रही। भीड़ प्रबंधन के लिए 70 कमर्शियल स्टाफ, 200 आरपीएफ कर्मी, 200 जीआरपी जवान तथा 60 होमगार्ड तैनात किए गए और वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में सभी व्यवस्थाएं संचालित की गईं।

भीड़ को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से यात्रियों को ट्रेन के निर्धारित समय से एक घंटा पूर्व ही प्लेटफॉर्म पर प्रवेश की अनुमति दी गई। इसके लिए उचित बैरिकेडिंग की गई थी। बिना टिकट यात्रा रोकने के लिए सभी प्रवेश बिंदुओं पर चेकिंग स्टाफ की तैनाती की गई, जिससे राजस्व संरक्षण के साथ-साथ भीड़ नियंत्रण में भी मदद मिली।

टिकटिंग को सरल और त्वरित बनाने के लिए विशेष प्रबंध किए गए। कुल 10 ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन, 15 फैसिलिटेटर, पांच मोबाइल यूटीएस तथा चार राउंड द क्लॉक बुकिंग काउंटर संचालित किए गए। पीक आवर्स में बुकिंग काउंटरों की संख्या बढ़ाकर छह कर दी गई। साथ ही हर चार घंटे में टिकट बिक्री की नियमित मॉनिटरिंग की गई। इस सतत निगरानी से यात्रियों की संख्या में संभावित वृद्धि का पूर्वानुमान लगाने में सहायता मिली और आसपास के स्टेशनों से अतिरिक्त कोचिंग रेक की व्यवस्था समय रहते सुनिश्चित की जा सकी।

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