भोपाल , जुलाई 30 -- मध्यप्रदेश की मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने दावा किया है कि वर्ष 2022 में खरगोन में रामनवमी के दिन हुए दंगा प्रकरण में अतिरिक्त जिला न्यायाधीश मुकेश नाथ ने पुलिस द्वारा आरोपी बनाए गए सभी 11 अल्पसंख्यक युवकों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है।
माकपा के राज्य सचिव जसविंदर सिंह द्वारा जारी बयान के अनुसार अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि 11 में से आठ प्रत्यक्षदर्शी गवाह आरोपियों की पहचान नहीं कर सके, जबकि जिन तीन गवाहों ने पहचान की, उनके बयान परस्पर विरोधाभासी पाए गए।
बयान में कहा गया कि अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि फॉरेंसिक जांच में पेट्रोल बम अथवा हाइड्रो बम के इस्तेमाल का कोई प्रमाण नहीं मिला। साथ ही पुलिस यह स्पष्ट नहीं कर सकी कि 50-60 लोगों की भीड़ में से इन 11 आरोपियों की पहचान किस आधार पर की गई। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि पहली प्राथमिकी में छह नाम होने के बाद पांच अन्य नाम किस आधार पर जोड़े गए।
माकपा ने आरोप लगाया कि दंगे के बाद उसके प्रतिनिधिमंडल ने घटनास्थल का दौरा किया था और उसकी रिपोर्ट के अनुसार मस्जिद के सामने डीजे बजाने तथा आपत्तिजनक नारे लगाए जाने के बाद विवाद शुरू हुआ था। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस हिरासत में एक युवक इदरीस की मृत्यु हुई थी तथा अल्पसंख्यक समुदाय के 16 मकान और 29 दुकानें भी ध्वस्त की गई थीं।
श्री सिंह ने कहा कि अदालत के निर्णय के बाद निर्दोष आरोपियों, उनके परिजनों तथा जिनके मकान और दुकानें तोड़ी गईं, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की जवाबदेही तय करने तथा दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की भी मांग की।
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