नयी दिल्ली , अक्टूबर 30 -- कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार को नरेन्द्र मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोलते हुए सरकार पर बढ़ती महंगाई, चढ़ते कर्ज और घटती बचत के जरिए आम परिवारों को गहरे आर्थिक संकट में धकेलने का आरोप लगाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि जो सरकार लोगों का वोट देने का अधिकार छीनने का प्रयास कर रही थी, वह अब रोजमर्रा की जिंदगी को लगातार खर्चीला बनाकर नागरिकों के सम्मान से जीने के अधिकार को चोट पहुंचा रही है।
त्योहारी सीजन के दौरान जीवन-यापन की बढ़ती लागत का जिक्र करते हुए श्री खरगे ने कहा कि महंगाई आम परिवारों की कमाई का हर एक पैसा निगल रही है, जिससे उनके लिए बुनियादी खर्च पूरे करना भी मुश्किल हो गया है।
सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट में उन्होंने कई आर्थिक आंकड़ों का हवाला देते हुए तर्क दिया है कि आर्थिक प्रगति के सरकारी दावों के बावजूद आम परिवारों की वित्तीय हालत लगातार बिगड़ रही है।
श्री खरगे द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, खाद्य मुद्रास्फीति (खाद्य महंगाई) 2.13 प्रतिशत से बढ़कर 7.74 प्रतिशत हो गई है, जबकि घरेलू कर्ज 36.7 प्रतिशत की दर से बढ़ा है, जो इसकी पिछली रफ्तार से तीन गुना ज्यादा है। उन्होंने यह दावा भी किया कि घरेलू वित्तीय बचत में चार प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि खुदरा महंगाई 5.54 प्रतिशत और थोक महंगाई 11.39 प्रतिशत पर बनी हुई है।
श्री खरगे ने कहा, "आंकड़े सच बयां करते हैं।" उन्होंने तर्क दिया कि यह डेटा देश में त्योहारी सीजन के जश्न के बीच आम नागरिकों पर बढ़ते वित्तीय बोझ को साफ तौर पर दर्शाता है। महंगाई के खिलाफ भाजपा के 2014 से पहले के प्रचार अभियान पर तंज कसते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने उसके बहुचर्चित नारे 'बहुत हुई महंगाई की मार' की याद दिलाई।
भाजपा ने तत्कालीन कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दौरान बढ़ती कीमतों को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया था।
उन्होंने भाजपा नेतृत्व को निरर्थक भाषणों और विरोध-प्रदर्शनों में उलझने के बजाय महंगाई विरोधी अपने खुद के पुराने विज्ञापनों को फिर से देखने की चुनौती दी। श्री खरगे ने कहा, "यदि सत्ता में रहते हुए भाजपा और मोदी जी को अपने व्यर्थ के भाषणों और प्रदर्शनों से कभी फुर्सत मिले, तो उन्हें 2014 से पहले का भाजपा का वह विज्ञापन एक बार फिर देखना चाहिए जिसमें लिखा था, 'बहुत हुई महंगाई की मार'।"सत्ता में 12 वर्ष पूरे कर चुकी सरकार के कामकाज पर सवाल उठाते हुए श्री खरगे ने कहा कि जनता ने एक दशक से अधिक समय तक वादे के मुताबिक 'अच्छे दिन' का इंतजार किया है, लेकिन उन्हें अब तक वह आर्थिक राहत नहीं मिली, जिसका वादा उनसे किया गया था।
उन्होंने कहा, "जनता ने 'अच्छे दिन' की उम्मीद में अपने 12 वर्ष गंवा दिए।"श्री खरगे का यह हमला महंगाई, घटती घरेलू वित्तीय सुरक्षा और विपक्ष द्वारा लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन के आरोपों पर मोदी सरकार के खिलाफ कांग्रेस के जारी राष्ट्रव्यापी अभियान के बीच आया है। पार्टी ने भाजपा पर 2014 से पहले कीमतों पर लगाम लगाने और आम नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार के अपने वादों से पीछे हटने का बार-बार आरोप लगाया है।
घरेलू खर्चों और बढ़ते कर्ज की तुलना सिकुड़ती बचत से करते हुए श्री खरगे ने आम परिवारों के सामने पैदा हुए आर्थिक दबावों का प्रमुखता से जिक्र किया। उन्होंने तर्क दिया कि महंगी होती जरूरी वस्तुओं और तंग होते घरेलू बजट से जूझ रहे लोगों के लिए त्योहारी सीजन भी कोई राहत लेकर नहीं आया है।
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