निवाड़ी , अक्टूबर 25 -- मध्यप्रदेश के निवाड़ी जिले में चंदेलकालीन नंदनवारा जलाशय (सुधासागर) के गणेश बांध और पहाड़ी पर स्थित शिव मंदिर के अस्तित्व पर खनन के कारण खतरा मंडराने की आशंका जताई गई है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि बांध के पास पहाड़ी पर लंबे समय से हो रहे गौरा पत्थर के खनन और ब्लास्टिंग से पहाड़ी में दरारें पड़ रही हैं, जिससे बांध की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

ग्रामीणों कल्लू केवट, हरगोविंद अहिरवार और सुक्का केवट के अनुसार, ईस्टन मिनरल कंपनी लगभग चार दशक से पहाड़ी पर गौरा पत्थर का खनन कर रही है। उनका आरोप है कि पहाड़ी पर किए जाने वाले ब्लास्ट से चट्टानों में दरारें पड़ रही हैं और पहाड़ी की परत कमजोर होने की आशंका है। इससे पहाड़ी पर बने शिव मंदिर और जलाशय के बांध को नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, नंदनवारा जलाशय का निर्माण बुंदेलखंड में सूखे की समस्या से निपटने के उद्देश्य से कराया गया था। बताया जाता है कि चंदेल शासकों ने बारगी नदी पर दो पहाड़ियों के बीच बांध बनवाया था, लेकिन शुरुआती निर्माण जल के दबाव और नदी के तेज बहाव के कारण क्षतिग्रस्त हो गए। बाद में ओरछा राज्य के महाराज वीर सिंह जू देव प्रथम ने वर्ष 1605 से 1627 के बीच बांध का पुनर्निर्माण कराया। बांध पर गणेश प्रतिमा स्थापित किए जाने के बाद इसे गणेश बांध नाम मिलने की मान्यता प्रचलित है।

स्थानीय जानकारी के अनुसार, जलाशय से लगभग 50 गांवों के करीब तीन हजार हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सिंचाई के लिए पानी मिलता है, जबकि निवाड़ी जिले के 84 गांवों की पेयजल व्यवस्था भी इससे जुड़ी बताई जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि बांध को नुकसान पहुंचने की स्थिति में कृषि और पेयजल व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

प्राकृतिक सौंदर्य और पहाड़ियों से घिरे इस क्षेत्र में पर्यटन की भी संभावनाएं हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां पिकनिक स्थल और नौकायन जैसी सुविधाएं विकसित कर रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं। ग्रामीणों ने बांध और शिव मंदिर की सुरक्षा के मद्देनजर खनन तथा ब्लास्टिंग के प्रभाव की जांच कराए जाने की आवश्यकता जताई है।

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