चंडीगढ़ , मार्च 11 -- पंजाब के जल संसाधन एवं खनन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने बुधवार को पंजाब विधानसभा में बजट चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि केंद्र सरकार की बेरुखी के कारण राज्य द्वारा सामना की जा रही कई वित्तीय बाधाओं के बावजूद यह एक बेहतरीन बजट है।

श्री गोयल ने कहा कि 2022 से लगभग तीन हजार करोड़ रुपये के वार्षिक जीएसटी मुआवजे को बंद किये जाने के बाद भी लोगों पर कोई नया कर लगाये बिना यह बजट पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं और केंद्र सरकार से वित्तीय सहयोग की कमी के साथ-साथ पंजाब के वैध फंड जारी करने में देरी का भी सामना किया है। इसके बावजूद, बजट समाज के हर वर्ग के लिए प्रमुख कल्याणकारी पहल सुनिश्चित करता है, जो इसे राज्य के लिए एक सराहनीय वित्तीय रोडमैप बनाता है।

खनन से अनुमानित 20 हजार करोड़ रुपये के राजस्व के मुद्दे पर बोलते हुए श्री गोयल ने कहा कि आप संयोजक अरविंद केजरीवाल द्वारा पहले दिया गया बयान पंजाब में पोटाश खनिज भंडार की अपार क्षमता पर आधारित था। उन्होंने स्पष्ट किया कि पोटाश एक महत्वपूर्ण खनिज है, जिसे वर्तमान में देश भर में कृषि उर्वरकों के लिए आयात किया जाता है। उन्होंने बताया कि पहले किये गये सर्वेक्षणों ने पंजाब के कुछ हिस्सों में पोटाश जमा होने का संकेत दिया था और पिछली सरकारों ने इस अवसर पर गंभीरता से काम नहीं किया, लेकिन मान सरकार ने इस मामले को केंद्र सरकार और केंद्रीय एजेंसियों के सामने उठाया। हमारे निरंतर प्रयासों के बाद, जिला फाजिल्का के गांव कबरवाला में लगभग 48 किलोमीटर क्षेत्र को कवर करते हुए 19.3 करोड़ रुपये की अनुमानित सर्वेक्षण लागत के साथ नए अन्वेषण का काम शुरू किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक ड्रिलिंग आकलन के अनुसार इस क्षेत्र में पाये गये पोटाश की गुणवत्ता उत्साहजनक है।

श्री गोयल ने कहा कि हालांकि अन्वेषण और नीलामी की शक्तियां केंद्र सरकार के पास हैं, लेकिन खनिज निष्कर्षण से मिलने वाली रॉयल्टी राज्य सरकार को प्राप्त होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एक बार अन्वेषण पूरा होने और खनन शुरू होने के बाद, राज्य महत्वपूर्ण रॉयल्टी आय उत्पन्न कर सकता है, जो 20,000 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है, साथ ही इससे आयातित उर्वरक खनिजों पर देश की निर्भरता भी कम होगी।

खनन विभाग के संबंध में उठायी गयी चिंताओं का जवाब देते हुए, कैबिनेट मंत्री ने कहा कि अवैध खनन के संबंध में बार-बार लगाए जाने वाले आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और अक्सर खनन कार्यों और नदियों की सफाई के बीच के अंतर को समझे बिना लगाये जाते हैं। उन्होंने कहा कि पहले जब बाढ़ आती थी, तो शिकायतें होती थीं कि गाद नहीं हटायी गयी और नदियों की सफायी नहीं हुई, लेकिन अब जब सरकार ने नदियों की गाद निकालना और सफाई करना शुरू कर दिया है, तो उसी गतिविधि को गलत तरीके से अवैध खनन बताया जा रहा है। वास्तव में यह कार्य पंजाब में नदियों के पुनरुद्धार और बाढ़ रोकथाम में योगदान देता है। उन्होंने सूचित किया कि पंजाब सरकार ने अवैध खनन के वास्तविक मामलों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है, जिसमें अब तक 1573 एफआईआर दर्ज की गयी हैं और 1655 चालान पेश किये गये हैं। जनहित में, पंजाब सरकार ने लुधियाना-रोपड़ राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के लिए तीन रुपये प्रति घन फुट की दर से मिट्टी की आपूर्ति की, जबकि बाजार मूल्य लगभग छह रुपये प्रति घन फुट है। इस सार्वजनिक परियोजना के लिए लगभग चार करोड़ घन मीटर मिट्टी उपलब्ध करायी गयी।

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा किये गये महत्वपूर्ण खनन सुधारों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। केंद्र सरकार द्वारा घोषित 'स्टेट माइनिंग रेडीनेस इंडेक्स' के अनुसार, पंजाब ने नीलामी प्रदर्शन, खदान संचालन और टिकाऊ खनन सुधारों सहित तीन श्रेणियों में खनन सुधारों में पहला स्थान हासिल किया है। उन्होंने कहा कि राज्य को इस उपलब्धि के लिए केंद्र सरकार से 200 करोड़ रुपये का इनाम मिला है जो राज्य के खजाने में जमा हो चुका है।

अपने निर्वाचन क्षेत्र में विकास की पहलों पर प्रकाश डालते हुए, कैबिनेट मंत्री ने लहरागागा में मेडिकल कॉलेज की घोषणा पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने सदन को सूचित किया कि चालू होने के बाद, मेडिकल कॉलेज एक महीने के भीतर ओपीडी और आईपीडी सेवाएं शुरू कर देगा और क्षेत्र के लोगों के लिए लगभग ग्यारह विशेषज्ञ डॉक्टर सेवाएं देना शुरू करेंगे।

सिंचाई सुधारों पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि 2022 में पदभार ग्रहण करने के बाद से, पंजाब सरकार ने भूजल पर अत्यधिक निर्भरता कम करने के लिए अंतिम छोर तक नहर के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने कहा कि पहले पंजाब अपने बांध के पानी के हिस्से का केवल 24 प्रतिशत ही उपयोग करता था, जबकि मान सरकार ने उपयोग को बढ़ाकर लगभग 78 प्रतिशत कर दिया है।

कैबिनेट मंत्री ने बताया कि पिछली सरकार के तीन साल के कार्यकाल के दौरान खर्च किये गये लगभग 2046 करोड़ रुपये की तुलना में नहर सिंचाई नेटवर्क को मजबूत करने के लिए लगभग 6500 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। प्रमुख कार्यों में फिरोजपुर फीडर की क्षमता को बढ़ाकर 2600 क्यूसेक करना, नहर को चौड़ा और गहरा करना और सरहिंद नहर की क्षमता में 2700 क्यूसेक का विस्तार करना शामिल है, जिससे लगभग 9.35 लाख एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा।

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