नैनीताल , अगस्त 20 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की ओर से खनन रॉयल्टी वसूलने और बिना टेंडर के खनन पट्टों पर खनन की अनुमति एक निजी कंपनी को दिए जाने संबंधी जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दायर करने के लिए तीन सप्ताह की और मोहलत दी।

हल्द्वानी निवासी संतोष सिंह हर्नवाल की ओर से दायर जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में सुनवाई हुई।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि प्रदेश सरकार ने खनिज परिहार नियमों में संशोधन कर रॉयल्टी वसूलने और खाली पड़े पट्टों पर खनन करने की अनुमति भी एक निजी कंपनी को दे दी है। रॉयल्टी वसूलना राज्य का संवैधानिक कार्य है, इसे निजी कंपनी को सौंपना राज्य के हितों के खिलाफ है।

याचिकाकर्ता ने कहा कि अदालत की ओर से पूर्व में राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वो खनन के लिए एक अलग कॉरपोरेशन बनाने पर विचार करे। जिस पर अभी तक कोई कार्यवाही नही की गई।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि जब मामला अदालत की सामने सुनवाई करने की लिए आया तो उसके परिवार वालों को जान से मारने की धमकी दी जा रही है। कोर्ट के आदेश के बावजूद एसएसपी नैनीताल की ओर से प्रगति रिपोर्ट पेश नहीं की गई है।

अदालत ने पूरे प्रकरण में सुनवाई के लिए तीन सप्ताह बाद की तिथि तय कर दी है।

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