नैनीताल , जुलाई 21 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने ठेकेदारों के पंजीकरण और नगर पालिका के ठेकों में भागीदारी को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए खटीमा नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी को बुधवार को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने दोनों अधिकारियों से कई बिंदुओं पर शपथपत्र दाखिल कर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

मामले को खटीमा निवासी विक्रम सिंह चौहान की ओर से चुनौती दी गई है। इस मामले में सोमवार को सुनवाई हुई लेकिन आदेश की प्रति आज उपलब्ध हो सकी। ईओ अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश हुई जबकि पालिका अध्यक्ष शहर से बाहर होने के कारण उपस्थित नहीं हो सके।

अदालत ने अगली सुनवाई 22 जुलाई को तय करते हुए नगर पालिका से यह बताने को कहा है कि 16 जुलाई 2023 को समाचार पत्र में सार्वजनिक सूचना के लिए प्रकाशित ड्राफ्ट उपविधियां अंतिम रूप ले चुकी हैं या नहीं। यदि उपविधियां अंतिम नहीं हुई हैं तो ठेकेदारों का पंजीकरण किस प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है? खंडपीठ ने यह भी पूछा है कि नगर पालिका इस वर्ष जारी होने वाले ठेकों में केवल वर्ष 2023-24 तक पंजीकृत ठेकेदारों को ही भाग लेने की अनुमति किस आधार पर दे रही है। इसके अलावा खंडपीठ ने यह भी पूछा है कि विगत छह अप्रैल को जारी आदेश के अनुपालन में नगर पालिका परिषद द्वारा क्या कदम उठाए गए हैं।

अदालत ने जवाबी हलफनामा में यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि पूर्व की रिट याचिका में याचिकाकर्ता के पहले से पंजीकृत होने और उसका नाम केवल राजपत्र में अधिसूचित किये जाने की बात नगर पालिका की ओर से कही गई थी, तो इस संबंध में नगर पालिका की ओर से क्या कार्रवाई की गई है।

याचिकाकर्ता की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि वह वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 में नगर पालिका में पंजीकृत ठेकेदार था और उसने आवंटित कार्य भी सफलतापूर्वक पूरे किए। इसके बावजूद वर्ष 2025-26 में केवल वर्ष 2023-24 से पहले पंजीकृत ठेकेदारों को पंजीकरण की शर्त लगाकर नगर पालिका ने उसे नए टेंडर और ठेकों में भाग लेने से वंचित कर दिया।

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