नयी दिल्ली , अक्टूबर 03 -- लंबी दूरी के क्वांटम-सुरक्षित नेटवर्क और उपग्रह आधारित क्वांटम संचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए पिछले दिनों देश के पहले फ्री-स्पेस 'क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन' (क्यूकेडी) लिंक का 5.56 किमी की दूरी पर सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया गया।
क्वांटम संचार पारंपरिक संचार प्रौद्योगिकियों के मुकाबले काफी तेज और काफी सुरक्षित माना जाता है। साथ ही इसका कई अलग-अलग तरह के क्षेत्रों में उपयोग किया जा सकता है।
क्वांटम-सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना के क्षेत्र में काम करने वाले क्यूएनयू लैब्स ने भास्करचार्य नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लीकेशन एंड जियो-इन्फॉर्मेटिक्स (बीआईएसएजी-एन) और आईआईटी गांधीनगर के साथ मिलकर यह उपलब्धि हासिल की।
यह परीक्षण 27-28 सितंबर की रात को किया गया। इसमें आईआईटी गांधीनगर और बीआईएसजीएन के बीच सुरक्षित क्वांटम संचार चैनल स्थापित किया गया। क्यूएनयू लैब्स के पॉइंटिंग, एक्विजिशन और ट्रैकिंग सिस्टम का उपयोग करते हुए इस परीक्षण में प्रतिशत से कम का स्थिर क्वांटम बिट एरर रेट हासिल किया गया और 230-260 बीपीएस की दर से सुरक्षित की (कुंजियां) बनायी गयी। इन कुंजियों को बीआईएसएजी-एन के पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी-सक्षम 'वैदिक कवच' प्लेटफॉर्म के साथ एकीकृत किया गया। इससे परीक्षण संदेश का सफल एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन और डिक्रिप्शन संभव हो सका।
इस प्रदर्शन में क्वांटम सुरक्षा की दो पूरक परतों को मिलाया गया। ये परतें हैं -फ्री-स्पेस ऑप्टिकल चैनलों पर क्यूएनयू लैब्स का हार्डवेयर-आधारित क्यूकेडी डिवाइस 'आर्मोस' और क्वांटम रैंडम नंबर जनरेशन के साथ बीआईएसएजी-एन का 'वैदिक कवच' सॉफ्टवेयर-आधारित पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी। यह इंटीग्रेटेड ढांचा तब भी सुरक्षा सुनिश्चित करता है जब भौतिक क्वांटम चैनल कुछ समय के लिए उपलब्ध न हो।
बीआईएसएजी-एन के महानिदेशक डॉ. विनय ठाकुर ने कहा कि क्यूएनयू लैब्स की क्यूकेडी तकनीक के साथ 'वैदिक कवच' का एकीकरण व्यावहारिक क्वांटम-सुरक्षित संचार प्रणाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
क्यूएनयू लैब्स के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनील गुप्ता ने इस बात पर बल दिया कि 5.56 किमी का यह सफल प्रदर्शन लंबी दूरी के क्वांटम-सुरक्षित नेटवर्क और उपग्रह-आधारित क्वांटम संचार का मार्ग प्रशस्त करता है।
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