मुंबई , अक्टूबर 30 -- मुंबई भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित साटम ने शुक्रवार को शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे से सवाल किया कि क्या मध्य वैतरणा बांध परियोजना के बदले में लगाए जाने वाले दो लाख पेड़ वास्तव में लगाए गए हैं और उन्होंने इस काम के लिए आवंटित धनराशि का हिसाब मांगा।
भाजपा राज्य कार्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, श्री साटम ने कहा कि 1997 से 2022 के बीच, जब बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) में शिवसेना की सरकार थी, तब मध्य वैतरणा बांध परियोजना के लिए लगभग एक लाख पेड़ काटे गए जबकि अनुमान के अनुसार केवल 10,000 पेड़ काटने की ही आवश्यकता थी।
उन्होंने बताया कि मुआवजे के रूप में, बीएमसी ने बीड जिले में 540 हेक्टेयर जमीन वन विभाग को सौंपी थी, ताकि वहां लगभग दो लाख पेड़ लगाए जा सकें, साथ ही इस काम के लिए करोड़ों रुपये भी दिए गए थे।
श्री साटम ने तंज कसते हुए कहा कि पर्यटन के लिए कर्जत जाने के बजाय श्री ठाकरे को बीड जिले का दौरा करना चाहिए, वहां लगाए गए पेड़ों की गिनती करनी चाहिए और बीएमसी द्वारा दिए गए वित्त का हिसाब मांगना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से आग्रह किया कि वैतरणा परियोजना के लिए काटे गए पेड़ों की संख्या की जांच के आदेश दिए जाएं और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
उन्होंने इस मामले में सर्वश्री उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे, राज ठाकरे, कांग्रेस पार्टी, अभिनेताओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की भूमिका की जांच की भी मांग की।
कर्जत के साई डोंगर इलाके में 'टोरेंट पावर' पंप स्टोरेज विद्युत परियोजना के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के प्रस्ताव को लेकर चल रहे विवाद का उल्लेख करते हुए, श्री साटम ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दल और कुछ समूह पर्यावरण संबंधी चिंताओं का उपयोग लोगों को गुमराह करने और विकास परियोजनाओं में बाधा डालने के लिए कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि भारत में बड़ी विकास परियोजनाओं के खिलाफ होने वाले विरोध-प्रदर्शनों को कभी-कभी विदेशी ताकतों का समर्थन मिलता है जो कुछ शहरी नेटवर्कों का वित्तपोषण करती हैं। ऐसी गतिविधियों से जुड़ी खुफिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए, उन्होंने दावा किया कि अब एनजीओ, शहरी नक्सली समूहों और विपक्षी दलों ने भी इन अभियानों में हिस्सा लेना शुरू कर दिया है।
श्री साटम ने आरोप लगाया कि कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी), महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और कुछ फिल्मी हस्तियां अशांति पैदा करने और भारत के विकास में बाधा डालने की कोशिशों में शामिल हैं। सतत विकास की अवधारणा को समझने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि विकास इस तरह होना चाहिए जिससे पारिस्थितिक संतुलन बना रहे और यह सुनिश्चित हो सके कि आने वाली पीढ़ियों को इसके बुरे परिणामों का सामना न करना पड़े।
उन्होंने आरोप लगाया कि पर्यावरण संरक्षण, वैश्विक तापवृद्धि और जलवायु परिवर्तन कुछ राजनीतिक नेताओं एवं कलाकारों के लिए फैशन का विषय बन गए हैं, जो अक्सर सतत विकास, स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन के सिद्धांतों को समझे बिना ही इन मुद्दों पर बात करते हैं। प्रस्तावित परियोजना के आर्थिक लाभों पर प्रकाश डालते हुए श्री साटम ने कहा कि 3,000 मेगावाट की टोरेंट पावर पंप स्टोरेज विद्युत परियोजना से महाराष्ट्र में हजारों प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे।
उन्होंने कहा कि इस परियोजना से बनने वाली बिजली का सबसे पहले महाराष्ट्र को फायदा मिलेगा और साथ ही यह भी कहा कि राज्य की आर्थिक वृद्धि और विकास के लिए ऐसी परियोजनाएं महत्वपूर्ण हैं।
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