कौशांबी , अक्टूबर 11 -- उत्तर प्रदेश के कौशांबी स्थित 51 शक्ति पीठों में शामिल शीतला देवी धाम कड़ा रविवार को तड़के से ही देवी के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार अपराह्न तक दो लाख से अधिक देवी भक्तों ने शीतला देवी के मंदिर में पहुंच कर माथा टेका और पुष्पमाला, चुनरी,नारियल, बताशा मिष्ठान, रोठ चढ़ा कर धूप दीप जलाकर आरती में भाग लिया।

नवरात्र के पहले दिन से ही गंगा तट से लेकर देवी मंदिर तक संपूर्ण वातावरण देवी के जय कारे से गूंजायमान है।शारदीय नवरात्र मेला 11 अक्टूबर से प्रारंभ होकर 20 अक्टूबर को समाप्त होगा। स्कंदपुराण में देवी महात्म्य के अनुसार प्रजापति महाराज दक्ष के पुत्री वह भगवान शिव की अर्धांगिनी देवी सती बिना बुलावा के जब पिता द्वारा आयोजित यज्ञ में पहुंची वहां अपने पति भगवान शिव का अपमान देखकर सती यज्ञ के हवन कुंड में कूदकर खुद को भस्म कर लिया था। जिसका समाचार मिलते ही पत्नी वियोग से व्यथित भगवान शिव क्रोधित हो उठे और सती के शव को लेकर तांडव करने लगे जिससे सभी लोकों में हलचल मच गयी। देव , दानव, मनुज, यक्ष, किन्नर, गंधर्व सहित सभी भयभीत हो उठे। इसके बाद भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्रसे देवी सती का एक-एक करके सभी अंग काट दिया था। कहा जाता है कि वर्तमान में कड़ा में जहां देवी का मंदिर है उस समय वहां वहां देवी सती का एक हाथ कट कर गिरा था।

शीतला देवी की सवारी गर्दभ है। हाथ में कलश, सूप और झाड़ू धारण किए हैं जिससे देवी को स्वच्छता का प्रत्येक भी माना जाता है। उनके हाथ में नीम का पत्ता है। कहा जाता है कि जिससे चेचक की बीमारी ठीक होती है। मान्यता है कड़ा धाम के आसपास के गांव के लोग चेचक की बीमारी से ग्रसित होने पर कोई दवा नहीं लेते हैं। देवी के चरण के पास स्थित जलहरी से जल ले जाकर मरीज के ऊपर छिड़कते हैं और रोगी ठीक हो जाता है, इसीलिए देवी भक्तों में विश्वास है कि नवरात्र के अवसर पर देवी दर्शन करने से समस्त पाप मिट जाते हैं।

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