रायपुर , अगस्त 07 -- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा संघ के नए प्रीमियम हैंडलूम ब्रांड 'कोशल फैब' का शुभारंभ करते हुए इसके लोगो व कैटलॉग का विमोचन किया, साथ ही हथकरघा इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर भी लॉन्च किया।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों, बुनकरों एवं शिल्पकारों को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि 7 अगस्त 1905 को शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन की याद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2015 से इस दिवस को मनाने की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का कोसा, बस्तर की बुनाई और पारंपरिक उत्पाद आज देश-दुनिया में पहचान बना रहे हैं। सरकार का लक्ष्य 'लोकल टू ग्लोबल' की नीति के तहत आधुनिक डिज़ाइन, प्रशिक्षण, ब्रांडिंग और नए बाजार उपलब्ध कराकर हथकरघा उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मंच देना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, महतारी वंदन योजना और रामलला दर्शन योजना जैसी पहलों के जरिए समाज के हर वर्ग का सशक्तिकरण किया जा रहा है।
वह यहां आयोजित प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शनी में भी शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने रेशम, हथकरघा, हस्तशिल्प, खादी एवं माटीकला बोर्ड के हितग्राहियों तथा मेधावी विद्यार्थियों को 10 करोड़ 90 लाख रुपये से अधिक की अनुदान व पुरस्कार राशि वितरित की।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बुनकरों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में 469 बुनकर परिवारों को शेड सह आवास निर्माण की स्वीकृति दी गई है। इस अवधि में आयोजित 47 प्रदर्शनियों के जरिए करीब 10 करोड़ रुपये के हथकरघा उत्पादों की बिक्री हुई है। इसके अलावा, 2,001 महिला स्व-सहायता समूहों को सिलाई पारिश्रमिक के रूप में 68 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। सरकारी विभागों को खादी व ग्रामोद्योग बोर्ड के जरिए 93 करोड़ रुपये तथा बुनकरों से 436 करोड़ रुपये के वस्त्रों की सरकारी खरीद कर उन्हें आर्थिक संबल प्रदान किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से देश के पांच प्रमुख हवाई अड्डों पर छत्तीसगढ़ के हैंडलूम एवं हस्तशिल्प उत्पादों के शोरूम स्थापित किए जा रहे हैं, जबकि रायपुर में यूनिटी मॉल का निर्माण जारी है। नवा रायपुर में प्रदेश की पहली गारमेंट इकाई स्थापित की जा रही है, जिससे 4,500 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा, वहीं नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट) की स्थापना से टेक्सटाइल क्षेत्र में युवाओं को नए अवसर मिलेंगे। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने बताया कि प्रदेश में लगभग 1.20 लाख परिवार हथकरघा गतिविधियों से जुड़े हैं और उन्होंने नागरिकों से प्रतिवर्ष कम से कम एक हथकरघा उत्पाद खरीदने की अपील की। ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव ने भी स्वदेशी आंदोलन की विरासत को याद करते हुए कोसा साड़ी के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने स्वदेशी प्रदर्शनी के स्टॉलों का अवलोकन किया और स्वयं तत्काल भुगतान कर कोसा साड़ी खरीदी। इस दौरान बस्तर की आत्मसमर्पित नक्सली महिलाओं द्वारा पारंपरिक कोसा सिल्क पहनकर किया गया रैंप वॉक आकर्षण का केंद्र रहा, जिसे बदलते बस्तर की सकारात्मक तस्वीर के रूप में देखा गया। मुख्यमंत्री ने उनसे आत्मीय संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया। इसके अतिरिक्त, एनआईसी के सहयोग से विकसित इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर, बुनकर डायरेक्टरी, टाई-डाई रंगाई पर पुस्तक और जशपुर के गोरिया में ग्लेजिंग यूनिट का शुभारंभ किया गया।
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