रायपुर , जुलाई 18 -- छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल लेवी घोटाले में गिरफ्तार कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने शुक्रवार को उन्हें रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया, जहां अदालत ने कोल लेवी मामले में उनकी पुलिस रिमांड 22 जुलाई तक बढ़ा दी। इसी दौरान ईओडब्ल्यू ने उन्हें कथित शराब घोटाले में भी गिरफ्तार कर लिया है, जबकि ओवरटाइम घोटाले में पूछताछ की अनुमति भी अदालत से प्राप्त कर ली है।

हिरासत के दौरान ईओडब्ल्यू ने विशेष अदालत को बताया कि अब तक की जांच में मिले तथ्यों के आधार पर लगभग 104 करोड़ रुपए कांग्रेस भवन तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। एजेंसी के अनुसार डायरियों तथा अन्य दस्तावेजों के दोबारा विश्लेषण के बाद यह तथ्य जांच में सामने आया है।

इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और ईओडब्ल्यू दोनों ने दावा किया था कि कोल लेवी से जुड़े 52.62 करोड़ रुपए रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचे थे। बाद में यह राशि 54.62 करोड़ रुपए बताई गई थी। अब ईओडब्ल्यू ने जांच के दौरान दावा किया है कि यह आंकड़ा बढ़कर 104 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।

ईओडब्ल्यू के अनुसार कोल लेवी मामले के आरोपी सूर्यकांत तिवारी तथा अन्य आरोपियों के ठिकानों से बरामद डायरियों के विश्लेषण के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया गया है। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर कथित वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की जा रही है।

जांच एजेंसी ने अदालत को यह भी बताया कि रामगोपाल अग्रवाल का आमना-सामना मामले के अन्य आरोपियों एवं गवाहों से कराया जाएगा। इनमें सूर्यकांत तिवारी, देवेंद्र डनसेना, निखिल चंद्राकर, रोशन सिंह, नारायण साहू तथा गवाह मोहसिन खान शामिल हैं। एजेंसी ने कहा कि इस प्रक्रिया के दौरान मामले से जुड़े दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी जब्त किए जाएंगे।

ईओडब्ल्यू ने कोल लेवी मामले में पुलिस रिमांड के दौरान ही रामगोपाल अग्रवाल की कथित शराब घोटाले में भी गिरफ्तारी दर्ज की। हालांकि इस मामले में अदालत ने उन्हें 25 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। चूंकि वह फिलहाल कोल लेवी मामले में पुलिस रिमांड पर हैं, इसलिए वे अभी ईओडब्ल्यू की हिरासत में ही रहेंगे।

सूत्रों के अनुसार 22 जुलाई को कोल लेवी मामले की रिमांड समाप्त होने के बाद ईओडब्ल्यू उन्हें पुनः अदालत में पेश कर शराब घोटाले में पुलिस रिमांड की मांग कर सकती है। वहीं, ओवरटाइम घोटाले में पूछताछ की अनुमति मिलने के बाद उस मामले में भी आगे की कानूनी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर उस प्रकरण में भी गिरफ्तारी की कार्रवाई की जा सकती है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित