रायपुर , जनवरी 12 -- छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल लेवी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय के रायपुर जोनल कार्यालय ने दो प्रमुख आरोपियों सौम्या चौरसिया और निखिल चंद्राकर से जुड़ी लगभग 2.66 करोड़ रुपये मूल्य की आठ अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से ज़ब्त किया है। इन संपत्तियों में जमीन के टुकड़े और आवासीय फ्लैट शामिल हैं।

ईडी की इस ताज़ा कार्रवाई के साथ ही कोल लेवी घोटाले में अब तक अटैच की गई संपत्तियों का कुल मूल्य 273 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। जांच एजेंसी ने सोमवार को कहा कि यह संपत्तियां प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत जारी प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के माध्यम से ज़ब्त की गई हैं।

ईडी का कहना है कि ये सभी अचल संपत्तियां अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई थीं और आरोपियों द्वारा इन्हें अपने रिश्तेदारों के नाम पर दर्ज कराया गया था। जांच में सामने आया है कि यह राशि कोयला लेवी के नाम पर की गई अवैध वसूली और अन्य जबरन वसूली गतिविधियों से प्राप्त की गई थी।

ईडी ने यह जांच बेंगलुरु पुलिस की एफआईआर क्रमांक 129/2022, आयकर विभाग द्वारा दायर अभियोजन शिकायत क्रमांक 3167/2023 (19 जून 2023) तथा ईओडब्ल्यू/एसीबी रायपुर की एफआईआर क्रमांक 03/2024 (11 जनवरी 2024) के आधार पर शुरू की थी। इन मामलों में छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन से जुड़ी अवैध वसूली के ठोस सबूत सामने आए थे।

जांच के दौरान ईडी ने खुलासा किया है कि जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच कोयला परिवहन करने वाले ट्रांसपोर्टरों से प्रति टन 25 रुपये की दर से अवैध वसूली की गई। यह वसूली एक संगठित सिंडिकेट के माध्यम से की जाती थी, जिसमें निजी व्यक्तियों के साथ-साथ कुछ प्रभावशाली राजनेताओं और नौकरशाहों की संलिप्तता सामने आई है। इस अवधि में करीब 540 करोड़ रुपये की अवैध वसूली किए जाने के प्रमाण मिले हैं।

ईडी के अनुसार, इस अवैध धन का उपयोग सरकारी अधिकारियों और नेताओं को रिश्वत देने, चुनावी खर्चों को पूरा करने तथा चल-अचल संपत्तियों की खरीद में किया गया।

अब तक की कार्रवाई में ईडी ने इस मामले में 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं 35 आरोपियों के खिलाफ पांच अभियोजन शिकायतें विशेष पीएमएलए अदालत में दाखिल की जा चुकी हैं। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि कोल लेवी घोटाले में आगे भी जांच और कार्रवाई जारी रहेगी।

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