कोल्हापुर/ रायगढ़ , जून 18 -- महाराष्ट्र सरकार के वन विभाग के तहत कंदलवन सेल, कंदलवन प्रतिष्ठान और स्थानीय 'टर्टल फ्रेंड्स' (कछुआ मित्र) के सहयोग से चलाए जा रहे 'ऑलिव रिडले समुद्री कछुआ संरक्षण कार्यक्रम' के तहत राज्य के 56 समुद्र तटों पर एक लाख से ज़्यादा कछुओं के बच्चों को समुद्र में छोड़ा गया है।

जारी की गयी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान राज्य के 56 समुद्र तटों पर कुल 1,724 कछुओं के घोंसले दर्ज किए गए। इन घोंसलों से कुल 1,08,596 कछुओं के बच्चों को सफलतापूर्वक समुद्र में छोड़ा गया और अंडों से बच्चों के निकलने की कुल सफलता दर 61.20 प्रतिशत रही। रत्नागिरी जिले में सबसे ज्यादा 964 घोंसले दर्ज किए गए, जिनसे 54,227 कछुओं के बच्चे समुद्र में छोड़े गए, जबकि सिंधुदुर्ग ज़िले में 738 घोंसलों से 53,325 बच्चे छोड़े गए।

राज्य में कछुओं के अंडे से बच्चे निकलने की सबसे ज़्यादा दर 69.95 प्रतिशत दर्ज की गयी। रायगढ़ जिले में 22 घोंसलों से 1,044 बच्चे निकले। इस सीज़न में, पहली बार रायगढ़ ज़िले के अराव, रत्नागिरी ज़िले के वेलनेश्वर, वरवाड़े, नेवारे, धोकमले, पूर्णगढ़, सालदुरे/पानंडे और कचरे और सिंधुदुर्ग के दाभोली और कोंदुरा के समुद्र तटों पर कछुओं के घोंसले देखे गये। समुद्र तटों पर अक्सर घायल या बीमार समुद्री कछुए पाए जाते हैं। मॉनसून के दौरान ऐसे कछुओं की संख्या बढ़ जाती है। अगर ज़िंदा कछुए बहकर तट पर आ जाते हैं, तो उनका तुरंत इलाज करने के लिए 'मरीन रिस्पॉन्डर ग्रुप' बनाया गया है।

मछुआरों के लिए मुआवज़ा योजना 2018 से कंडलवन सेल, कंडलवन प्रतिष्ठान और महाराष्ट्र मत्स्य विभाग के सहयोग से लागू की गयी है। इस योजना के तहत, उन मछुआरों को मुआवजा दिया जाता है जो मछली पकड़ते समय अपने जाल में फँसे समुद्री कछुओं और अन्य संरक्षित समुद्री जीवों को जाल काटकर बचाते हैं।

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