कोलकाता , जून 04 -- पश्चिम बंगाल सरकार ने गुरुवार को राज्य के परिवहन और जलमार्ग अवसंरचना के विकास के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप पेश करते हुए कोलकाता में आधुनिक वॉटर मेट्रो सेवा शुरू करने की योजना की घोषणा की।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नाबन्ना में केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के साथ बैठक के बाद यह घोषणा की। बैठक में अंतरदेशीय जल परिवहन, बंदरगाह विकास तथा राज्य में भविष्य की आधारभूत संरचना परियोजनाओं पर चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोलकाता देश का 18वां शहर बनने जा रहा है, जिसे वॉटर मेट्रो नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। यह सेवा जलमार्गों के माध्यम से तेज, पर्यावरण-अनुकूल और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि देश के अन्य हिस्सों में इस परियोजना का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया जा चुका है। वॉटर मेट्रो परियोजना की शुरुआत सबसे पहले कोच्चि में की गयी थी और अब केंद्र सरकार के कार्यक्रम के तहत इसे कई अन्य शहरों तक विस्तारित किया जा रहा है। गुवाहाटी, श्रीनगर, पटना, वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज भी इस सेवा से जुड़ने वाले शहरों में शामिल हैं। अधिकारियों का मानना है कि कोलकाता के लिए यह परियोजना विशेष रूप से लाभकारी साबित होगी, क्योंकि यहां जल आधारित परिवहन लंबे समय से दैनिक आवागमन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। हुगली नदी और उसकी सहायक धाराएं क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों को जोड़ती हैं, जिससे वॉटर मेट्रो के माध्यम से यातायात दबाव कम करने और सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि पश्चिम बंगाल केंद्र की सागरमाला 2.0 योजना में शामिल होगा। राज्य पहले चरण में इस प्रमुख समुद्री विकास कार्यक्रम का हिस्सा नहीं था। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत पश्चिम बंगाल अगले पांच वर्षों में 22,700 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का प्रस्ताव तैयार करेगा। इन निवेशों का उद्देश्य बंदरगाह संपर्क को मजबूत करना, तटीय नौवहन का विस्तार करना, मत्स्य अवसंरचना को विकसित करना तथा तटीय समुदायों के विकास को बढ़ावा देना है।

विकास के लिए चिह्नित क्षेत्रों में सागर, काकद्वीप, नामखाना, झारखाली, हिंगलगंज, बक्खाली, गोसाबा, बसंती और संदेशखाली शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं से तटीय क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, परिवहन संपर्क बेहतर होगा तथा मत्स्य और समुद्री उद्योगों पर निर्भर लोगों की आजीविका मजबूत होगी। इन घोषणाओं को राज्य सरकार द्वारा जलमार्ग आधारित बुनियादी ढांचे और संपर्क व्यवस्था के विस्तार की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। वॉटर मेट्रो नये गहरे समुद्री बंदरगाह और प्रशासनिक सुधारों जैसी योजनाओं के माध्यम से सरकार जलमार्गों को राज्य के भविष्य के आर्थिक और परिवहन विकास का प्रमुख आधार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

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