कोलकाता , जून 17 -- पश्चिम बंगाल के कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस (तृणमूल ) का अस्थायी पार्टी मुख्यालय खाली किया जा रहा है।

यह कदम तृणमूल और कारोबारी मनोतोष साहा (जिन्हें मोंटू साहा के नाम से भी जाना जाता है) के बीच बढ़ते विवाद के कारण उठाया जा रहा है। श्री साहा को कभी पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का करीबी सहयोगी माना जाता था।

यह घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस और श्री साहा के रिश्तों में आए बड़े बदलाव को दिखाता है। श्री साहा ने सालों तक पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों में सामग्री प्रबंधन से जुड़े कार्यों में अहम भूमिका निभायी थी। सूत्रों के मुताबिक, श्री साहा ने मई में पार्टी को दो महीने का नोटिस दिया था, जिसमें दुर्गा बाड़ी से सटी अपनी इमारत को खाली करने के लिए कहा गया था। वर्षाें तक तृणमूल के संगठन से जुड़े कई काम इसी इमारत से होते रहे, हालांकि यह साफ नहीं है कि शुरुआत में कोई औपचारिक किराया समझौता हुआ था या नहीं।

विधानसभा चुनाव के बाद हुए राजनीतिक बदलावों के बाद श्री साहा ने जगह खाली करने करने को कहा। हालांकि दूरियां बढ़ने के संकेत पहले ही मिल चुके थे। श्री साहा की कंपनी, 'मॉडर्न डेकोरेटिंग' ने चुनाव नतीजों के बाद पार्टी को सेवायें देना बंद कर दिया था। यह कंपनी आम तौर पर तृणमूल के कार्यक्रमों के लिए स्टेज का ढांचा, साउंड सिस्टम, कुर्सियां और समारोह से जुड़े अन्य सामानों की आपूर्ति करती थी।

बिल्डिंग के कुछ हिस्सों को खाली करने का काम मंगलवार देर रात तेज़ हो गया। सूत्रों के मुताबिक जिन दो मंजिलों का इस्तेमाल तय शर्तों से हटकर किया जा रहा था, उन्हें खाली करा लिया गया, जबकि तीसरी और चौथी मंजिल पर ताला लगा दिया गया। परिसर से फर्नीचर और अन्य सामान हटा दिया गया। चश्मदीदों का कहना है कि मंगलवार रात भर दफ्तर के बाहर कई मालवाहक गाड़ियां खड़ी थीं और बुधवार तड़के वे सामान लेकर चली गयीं।

श्री साहा के एक प्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि समझौते में सिर्फ़ दो मंज़िलों के इस्तेमाल की बात थी, लेकिन पार्टी बिना इजाज़त के दो और मंज़िलों का इस्तेमाल कर रही थी।

गौरतलब है कि उत्तर पंचाननग्राम में बाईपास पर पार्टी मुख्यालय के पुनर्निमाण का काम होने की वजह से 2021 से पार्टी के सभी काम इसी पाँच मंज़िला बिल्डिंग से हो रहा था। अस्थायी दफ्तर के भूतल का इस्तेमाल ज़िलों से आने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं के लिये "प्रतीक्षा क्षेत्र" के तौर पर किया जाता था, जबकि दूसरी मंज़िल पर मीडिया सेंटर था। विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद से ही श्री साहा और तृणमूल के बीच खींचतान चल रही थी और श्री साहा ने संकेत दिया था कि वह इस मामले में पुलिस की मदद लेंगे, क्योंकि बार-बार कहने के बावजूद जगह खाली नहीं की जा रही थी। श्री साहा ने प्रॉपर्टी के लॉक किये गये हिस्सों को खाली कराने के लिए प्रगति मैदान थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी।

इसके बाद, बेलेघाटा के विधायक कुणाल घोष और पार्टी प्रदेश अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य समेत तृणमूल नेताओं ने भी पुलिस से संपर्क किया और किराए की रसीद समेत कई दस्तावेज़ सौंपे। तृणमूल सूत्रों के मुताबिक, पार्टी का श्री साहा के साथ 2027 तक उस जगह का इस्तेमाल करने का वैध समझौता था। उनका दावा है कि चुनाव में हार के बाद श्री साहा ने इस व्यवस्था को जारी रखने पर आपत्ति जताई थी। अभी तक ना तो बिल्डिंग के मालिक की तरफ़ से और न ही तृणमूल नेतृत्व की तरफ़ से ताज़ा घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है।

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