कोटा , नवम्बर 01 -- लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राजस्थान में कोटा में रविवार को करीब 290 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले एकीकृत जिला न्यायालय परिसर एवं अधिवक्ता कक्षों का शिलान्यास किया।

इस अवसर पर श्री बिरला ने कहा कि राज्य का सबसे बड़ा और आधुनिक जिला न्यायालय परिसर बनने जा रहा है। लंबे समय से अधिवक्ता, न्यायिक अधिकारी और आम नागरिक चाहते थे कि न्यायालयों से जुड़ी सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिलें। नए परिसर से उनकी यह जरूरत पूरी होगी और न्यायिक कार्यों में भी आसानी होगी।

उन्होंने कहा कि न्यायालय भवन बन रहा है यह हमारी उपलब्धि है, लेकिन उससे भी जरूरी है कि आम आदमी को सरल, सुलभ, त्वरित और निष्पक्ष न्याय मिले। अदालत में आने वाले हर व्यक्ति को सम्मान के साथ बैठने और अपनी बात रखने की सुविधा मिलनी चाहिए। इसके लिए न्यायपालिका, अधिवक्ताओं और प्रशासन को मिलकर काम करना होगा।

श्री बिरला ने कहा कि अलग-अलग स्थानों पर संचालित न्यायालयों के कारण न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और वादकारियों को परेशानी होती है। नए परिसर में सभी न्यायालय एक स्थान पर होंगे। यहां आधुनिक तकनीक, अधिवक्ता चैंबर और वादकारियों के बैठने की व्यवस्था होगी। परिसर में 54 न्यायालय, करीब 240 अधिवक्ता चैंबर, कैंटीन, बैंक, लाइब्रेरी, बैठक कक्ष, टाइपिस्ट, फोटोकॉपी और दुकानों की सुविधाएं प्रस्तावित हैं। अधिवक्ता कक्षों के निर्माण की निविदा प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि न्यायालय के साथ मिनी सचिवालय की योजना पर कार्य जारी है ताकि लोगों को न्यायिक और प्रशासनिक कामों के लिए अलग-अलग स्थानों पर नहीं जाना पड़े। कोटा में उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। न्यायालय और मिनी सचिवालय के विकास से इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण जरूरत पूरी होगी। उन्होंने सीमित सुविधाओं के बावजूद बेहतर कार्य करने के लिए न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और कर्मचारियों के योगदान को सराहा।

समारोह में राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार अग्रवाल ने कहा कि नया जिला न्यायालय परिसर भवन निर्माण के साथ आमजन को सरल, त्वरित और निष्पक्ष न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। न्यायालय की सही पहचान इमारत से नहीं, बल्कि निष्पक्ष न्याय से होती है। नए परिसर में महिलाओं, दिव्यांगजनों, वरिष्ठ नागरिकों और कमजोर वर्गों की सुविधाओं का ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था में डिजिटल तकनीक जरूरी है, लेकिन वह न्याय का विकल्प नहीं हो सकती।

न्यायाधीश सुदेश बंसल ने कहा कि नए जिला न्यायालय परिसरों के साथ अधिवक्ताओं के लिए भी चैंबर और बैठने की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने विधि मंत्री से आग्रह किया कि यह सुविधा केवल कोटा तक सीमित न रहे, बल्कि राज्य के सभी जिलों में अधिवक्ता चैंबर बनाए जाएं। इससे अधिवक्ताओं को सुविधा मिलेगी और नए न्यायालय परिसरों में कामकाज भी सुचारू रूप से चल सकेगा।

समारोह में संसदीय कार्य एवं विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि नए न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं और वादकारियों को पार्किंग, लाइब्रेरी, स्वास्थ्य एवं आधुनिक सुरक्षा सहित बेहतर सुविधाएं एक ही स्थान पर मिलेंगी। उन्होंने इस पहल के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और मुख्य न्यायाधीश का आभार जताया। श्री पटेल ने बताया कि पिछले दो वर्षों में विधानसभा ने 37 महत्वपूर्ण कानून पारित किए हैं। पुराने एवं अनुपयोगी कानूनों को हटाने की प्रक्रिया भी जारी है।

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