चंडीगढ़ , अक्टूबर 14 -- पंजाब में कोटकपूरा और बहिबल कलां गोलीकांड के 11 साल बाद भी किसी आरोपी के खिलाफ आरोप तय नहीं होने पर पूर्व विशेष मुख्य सचिव केबीएस सिद्धू ने निराशा जताई है।

उन्होंने केंद्र और पंजाब सरकार से दोनों मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए समन्वय समिति गठित करने तथा स्वतंत्र विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि दिसंबर में साहिबजादों के शहीदी पखवाड़े तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वह पंथ के अन्य प्रतिनिधियों के साथ उच्चतम न्यायालय का रुख करेंगे। श्री सिद्धू ने बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को संयुक्त पत्र लिखकर केंद्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता में स्थायी समन्वय समिति बनाने का प्रस्ताव दिया। इसमें पंजाब और चंडीगढ़ के मुख्य सचिव, भारत सरकार के सॉलिसिटर जनरल तथा पंजाब के महाधिवक्ता को शामिल करने की मांग की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समिति अभियोजन पक्ष के कामकाज की निगरानी करेगी, न्यायालय की कार्यवाही में हस्तक्षेप नहीं करेगी। उन्होंने अप्रैल 2026 में की गई अपनी मांग दोहराते हुए दोनों मामलों के लिए स्वतंत्र विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने की अपील की। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने 2जी स्पेक्ट्रम और कोयला ब्लॉक आवंटन मामलों में भी ऐसा कदम उठाया था।

सिद्धू के अनुसार, एक जून 2015 को बुर्ज जवाहर सिंह वाला के गुरुद्वारे से श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पावन स्वरूप चोरी हुआ था और 12 अक्टूबर को बरगाड़ी में उसके फटे हुए अवशेष मिले थे। इसके विरोध में 14 अक्टूबर 2015 को शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे सिखों पर पुलिस ने गोलीबारी की थी। बहिबल कलां में गुरजीत सिंह और कृष्ण भगवान सिंह की मौत हो गई थी, जबकि कोटकपूरा में अजित सिंह सहित कई लोग घायल हुए थे। उन्होंने कहा कि दोनों मामलों की सुनवाई अब चंडीगढ़ में हो रही है। बहिबल कलां मामला 2024 में चंडीगढ़ स्थानांतरित किया गया था, जबकि कोटकपूरा मामले को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के नौ अप्रैल 2026 के आदेश के बाद वहां स्थानांतरित किया गया। सिद्धू के मुताबिक, एक अगस्त 2026 को भी जांच लंबित होने संबंधी स्थिति रिपोर्ट चंडीगढ़ की अदालत में सीलबंद लिफाफों में दाखिल की गई थी। उन्होंने अभियोजन पक्ष की स्वतंत्रता पर भी सवाल उठाए, क्योंकि संबंधित मामलों में पुलिस अधिकारी आरोपी हैं।

सिद्धू ने श्री अकाल तख्त साहिब से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने और सभी सिखों के लिए हुकमनामा जारी करने पर विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवकों सहित सभी सिखों को अपने कानूनी दायित्वों के दायरे में न्याय प्रक्रिया को तेज करने में सहयोग देना चाहिए। उन्होंने पंजाब, चंडीगढ़ और अन्य स्थानों के वकीलों से भी पीड़ित परिवारों की सहायता करने का आग्रह किया। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार सरकारों ने न्याय दिलाने के वादे किए, लेकिन मामला मुकदमे की निर्णायक प्रक्रिया तक नहीं पहुंच पाया। उनके अनुसार, न्याय में देरी से साक्ष्यों, गवाहों और न्याय व्यवस्था में लोगों के विश्वास को नुकसान पहुंचता है।

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