कोण्डागांव , मई 28 -- छत्तीसगढ़ के कोण्डागांव जिला मुख्यालय से महज पांच किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत कुम्हारपारा के कोपरा पारा में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। करीब 35 से 40 परिवारों की बस्ती में आज तक एक भी शासकीय हैंडपंप नहीं लग पाया है, जिसके कारण ग्रामीणों, खासकर महिलाओं को भीषण गर्मी में आधा से एक किलोमीटर दूर नदी से पानी लाकर जीवन यापन करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार राजमार्ग निर्माण के दौरान मुख्य पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने के कारण क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति पूरी तरह प्रभावित है। स्थिति यह है कि महिलाएं छोटे-छोटे बच्चों को गोद में लेकर तपती धूप और उबड़-खाबड़ रास्तों से होकर नदी से पानी लाने को मजबूर हैं। कई परिवारों को दिन में दो से तीन बार यह दूरी तय करनी पड़ती है।
ग्रामीणों ने बताया कि बस्ती में केवल तीन से चार घरों में निजी बोरवेल हैं, जहां से पानी लेने के एवज में प्रति माह 300 रुपये देने पड़ते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार यह राशि देने में असमर्थ हैं, इसलिए उन्हें नदी के पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इससे जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि पास की दूसरी बस्ती में लगा हैंडपंप काफी दूर है और उसका पानी लाल तथा खराब स्वाद वाला है, जिससे वह पीने योग्य नहीं रह गया है। ऐसे में नदी ही एकमात्र सहारा बचा है। गर्मी बढ़ने के साथ नदी का जलस्तर भी घटने लगा है, जिससे संकट और गहराने की आशंका है।
गोद में छह माह के बच्चे को लेकर पानी भरने पहुंची पिंकी चक्रधारी ने बताया कि गांव में पानी की भारी समस्या है और रोज नदी से पानी लाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि मायके में बोरवेल होने के कारण उन्हें कभी ऐसी परेशानी नहीं हुई थी। उन्होंने भावुक होकर कहा कि यदि पहले पता होता कि यहां पानी के लिए इतनी जद्दोजहद करनी पड़ेगी, तो वह इस गांव में शादी नहीं करतीं। उन्होंने बताया कि महिलाएं पीने के लिए रेत हटाकर झिरिया का पानी निकालती हैं, जबकि नदी के गंदे पानी का उपयोग नहाने और कपड़े धोने में किया जाता है।
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