मुंबई , जुलाई 07 -- महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार ने मंगलवार को राज्य विधानसभा को अवगत कराया कि राज्य के कोंकण क्षेत्र में भविष्य की विकास परियोजनाओं की योजना तभी बनाई जाएगी जब वहां मौजूद प्रागैतिहासिक शैल कला की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित हो जाए।

उन्होंने बताया कि इन स्थलों के संरक्षण और विकास के लिए एक व्यापक योजना तैयार की गई है। यह मुद्दा विधायक विट्ठल लांघे ने एक तारांकित प्रश्न के माध्यम से उठाया था, जिसके बाद विधायकों भास्कर जाधव, शेखर निकम, विक्रांत पचपुते और नाना पटोले ने चर्चा में भाग लिया। श्री शेलार ने बताया कि रत्नागिरी क्षेत्र में लगभग 300 किमी लंबाई और 25 किमी चौड़ाई वाले इलाके में 150 से अधिक स्थानों पर 2,000 से अधिक प्रागैतिहासिक शैल कला (जियो-ग्लिफ्स) की पहचान की गई है। उन्होंने इन नक्काशी को प्रागैतिहासिक समाजों और मानव विकास का अमूल्य प्रमाण बताया।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक शैल कला का दस्तावेजीकरण विस्तृत ऑडियो-विजुअल रिकॉर्डिंग के माध्यम से किया जाना चाहिए, जिसमें अलग-अलग दूरियों, सभी मौसमों और उन्नत तकनीकों का उपयोग हो।

श्री शैलार के अनुसार, पर्यटन और सांस्कृतिक मामलों के विभाग द्वारा आठ अप्रैल, 2026 को जारी सरकारी प्रस्ताव के तहत, कोंकण शैल कला पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का वृतचित्र बनाने के लिए पुरातत्व और संग्रहालय निदेशालय को 14.50 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी गई है। आवश्यक धनराशि पहले ही उपलब्ध करा दी गई है। इस वृतचित्र का बजट अंतरराष्ट्रीय बाजार का सर्वेक्षण करने के बाद तैयार किया गया है। इस परियोजना के तहत लगभग 45 मिनट की उच्च-गुणवत्ता वाली सिनेमाई वृतचित्र बनाई जाएगी, जिसमें एआई की मदद से प्रागैतिहासिक जीवन और संस्कृति का दृश्य पुनर्निर्माण दिखाया जाएगा। इसके अलावा, यूनेस्को की संभावित विश्व धरोहर सूची में शामिल नौ रॉक आर्ट स्थलों और उनके बफर जोन में से प्रत्येक के लिए आठ मिनट का अलग-अलग लघु वृतचित्र बनाया जाएगा। पूरी फिल्मिंग प्रक्रिया को दिखाने वाली एक समर्पित 'बिहाइंड-द-सीन्स' डॉक्यूमेंट्री भी बनाई जाएगी।

इसके अलावा, निदेशालय एक व्यापक संग्रह तैयार करेगा जिसमें सभी स्थलों का पूरा रॉ फुटेज, ड्रोन-आधारित हवाई सिनेमैटोग्राफी और प्रकाशन तथा दीर्घकालिक संरक्षण के लिए उपयुक्त उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाली तस्वीरें शामिल होंगी। इस परियोजना के तहत तैयार किए गए ऑडियो-विज़ुअल कंटेंट का इस्तेमाल एक डिजिटल कंटेंट बैंक बनाने में भी किया जाएगा, जिसमें सोशल मीडिया के लिए प्रमोशनल सामग्री , इन्फोग्राफिक्स और लोगों तक पहुँचने के लिए अन्य कंटेंट शामिल होंगे।

श्री शेलार ने सदन को यह भी बताया कि आस-पास के इलाकों को पर्यटन के नज़रिए से विकसित करने और आने वाले लोगों के लिए सुविधाएँ देने के लिए पहले ही एक कार्य योजना तैयार की जा चुकी है। इस योजना के अनुसार सुरक्षा दीवारें बनाने और उससे जुड़े अन्य काम पहले ही शुरू हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि योजना इस तरह से की गई है कि जिन निजी ज़मीन मालिकों की ज़मीन पर ये रॉक आर्ट साइट्स मौजूद हैं, उन्हें भी इसका फ़ायदा मिले।

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