रुद्रपुर , अप्रैल 24 -- उत्तराखंड के ग्राम्य विकास, लघु एवं सूक्ष्म मध्यम उद्यम मंत्री भरत सिंह चौधरी ने शुक्रवार को विकास भवन सभागार में ग्राम्य विकास की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा बैठक की।

उन्होंने जनपद में हो रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि योजनाओं में अच्छा प्रदर्शन हो रहा है, लेकिन और बेहतर करने की हमेशा गुंजाइश रहती है।

बैठक में मंत्री ने अमृत सरोवर, ग्रोथ सेंटर, वीबीजी राम जी, ग्रामोत्थान रीप योजना, एनआरएलएम, लखपति दीदी, डेयरी और मत्स्य पालन योजनाओं के साथ-साथ उद्योग विभाग की मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना और एमएसएमई योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की।

उन्होंने विशेष रूप से महिला स्वयं सहायता समूहों की आजीविका बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि वे अपने कार्यों को और बेहतर तरीके से कर सकें। उन्होंने समूहों द्वारा तैयार उत्पादों के वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। साथ ही उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और 'हाउस ऑफ हिमालय' के माध्यम से बाजार उपलब्ध कराने को कहा।

उन्होंने सुझाव दिया कि महिला समूहों को सिलाई प्रशिक्षण देकर स्कूलों, पुलिस और पीआरडी की वर्दियां तैयार कराने का काम दिया जाए, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके। जसपुर क्षेत्र में खादीदी बोर्ड की परिसंपत्तियों का चिन्हांकन कर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए।

क्षेत्रीय विधायक शिव अरोरा ने मंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि जनपद में ग्राम्य विकास विभाग सराहनीय कार्य कर रहा है और मंत्री के मार्गदर्शन में और प्रगति करेगा।

मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शाशनी ने बताया कि जिले में 8006 स्वयं सहायता समूहों से करीब 82 हजार सदस्य जुड़े हैं। अब तक 38,275 महिलाएं 'लखपति दीदी' बन चुकी हैं और 7054 समूहों को 927 लाख रुपये का रिवॉल्विंग फंड दिया गया है। जिले में सात ग्रोथ सेंटर संचालित हैं, जहां महिलाएं बेकरी, मसाला, रजाई, डेयरी और हस्तशिल्प से जुड़ा कार्य कर रही हैं।

उन्होंने बताया कि अमृत सरोवरों को मत्स्य पालन के लिए स्वयं सहायता समूहों को आवंटित किया गया है, जिस पर मंत्री ने ट्राउट मछली को बढ़ावा देने और उसकी मार्केटिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

इसके अलावा, 10 दिवसीय सरस मेले में 170 स्टॉल लगाए गए, जिनसे लगभग 4 करोड़ रुपये की बिक्री हुई। रीप योजना के तहत 32 कलेक्शन सेंटर स्वीकृत हैं, जिनमें से 8 बन चुके हैं, 17 निर्माणाधीन हैं और 7 के लिए भूमि चिन्हित की जा रही है। साथ ही 28 महिलाओं को ई-रिक्शा प्रशिक्षण देकर पिंक ई-रिक्शा उपलब्ध कराए गए हैं।

श्री चौधरी ने दुग्ध व्यवसाय को बढ़ावा देने, दुग्ध उत्पादों के वैल्यू एडिशन और पशुपालकों को प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित