नयी दिल्ली , अगस्त 16 -- नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने चिंता व्यक्त किया था कि रेलवे स्टेशनों पर उपलब्ध पानी पीने डायरिया और फ़ूड पॉइज़निंग हो सकती है, जिसके बाद रेलवे ने अब कई सुधारात्मक कदम उठाया है। रेलवे ने यात्रियों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए लगभग 20,000 स्थानों पर नया वाटर कूलरों सहित 'टैंक टू टैप' जल फिल्टरेशन प्रणाली लगाने और पूरे रेलवे नेटवर्क में लगभग 20,000 स्थानों पर जल फिल्टरेशन एवं निगरानी प्रणाली स्थापित करने की निर्णय लिया है।
रेलवे ने यह कदम रेलवे स्टेशनों पर उपलब्ध पेयजल को लेकर कैग की रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए उठाया है। रेलवे ने रविवार को बताया कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीआरबी और सीईओ) सतीश कुमार तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने रेलवे स्टेशनों के पेयजल को लेकर कैग की रिपोर्ट की समीक्षा की और यात्रियों को सुरक्षित पेयजल मुहैया कराने के लिए तत्काल सुधारात्मक उपायों के आदेश दिए गये।
रेलवे के अनुसार, उन्होंने सुधारात्मक कार्रवाई के तहत लगभग 20,000 स्थानों पर नया वाटर कूलरों सहित 'टैंक टू टैप' जल फिल्टरेशन प्रणाली लगाने और पूरे रेलवे नेटवर्क में लगभग 20,000 स्थानों पर जल फिल्टरेशन एवं निगरानी प्रणाली स्थापित करने की निर्णय लिया। इसके साथ ही पानी की टंकियों को बदलना, जल स्रोत और आउटलेट स्थानों पर नियमित जल गुणवत्ता का परीक्षण करना, केंद्रीकृत निगरानी एवं जवाबदेही केंद्र स्थापित करना और स्टोरेज टंकियों की समय पर सफाई और रखरखाव जैसे कदम उठाने का निर्णय लिया। रेलवे ने बताया कि बोर्ड स्तर से इन सभी कार्रवाइयों की निगरानी की जाएगी।
गौरतलब है कि कैग ने रेलवे के 16 ज़ोनों के 512 रेलवे स्टेशनों का ऑडिट किया है और इनमें से 458 स्टेशन यानी 89 फ़ीसदी से ज़्यादा स्टेशनों में आवश्यक यात्री सुविधाओं (एमईए) में कमी पाया है। कैग की रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि ऐसे स्टेशनों में नयी दिल्ली, हावड़ा, मुंबई सेंट्रल, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी), अहमदाबाद, चेन्नई सेंट्रल और सिकंदराबाद जैसे देश के प्रमुख रेलवे स्टेशन भी शामिल हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक़ करोड़ों रुपये कमाने वाले कई बड़े स्टेशनों पर पीने के पानी, शौचालय, बैठने की व्यवस्था, प्लेटफॉर्म शेल्टर और दिव्यांगजनों की सुविधाओं जैसी बुनियादी चीज़ों उपलब्ध नहीं हैं। कैग की रिपोर्ट में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर चिंता जताई गयी है। कैग की रिपोर्ट के अनुसार कई स्टेशनों पर पानी की नियमित जांच नहीं हुई है। वहीं कैग की रिपोर्ट में कुछ जगहों पर पानी में क्लोरीन का स्तर निर्धारित मानकों से कम या ज़्यादा पाया गया। कई स्टेशनों के पानी के नमूनों में ई-कोलाई और टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया भी पाए गए, जिससे लोगों की तबीयत ख़राब हो सकती है।
कैग की रिपोर्ट के अनुसार ई-कोलाई के कुछ संक्रमणों से डायरिया, फ़ूड पॉयजनिंग जैसी बीमारियां हो सकती हैं और कुछ मामलों में किडनी भी ख़राब हो सकती है।
कैग ने पाया है कि कई बड़े स्टेशनों पर पीने के पानी के नल कम हैं। साफ़-सफ़ाई की सुविधाओं (मूत्रालय एवं शौचालय) की कमी है। पर्याप्त पंखे और कूलर नहीं हैं और कई जगह साइन बोर्डों की कमी है।
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