तिरुवनंतपुरम , अगस्त 03 -- केरल के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने सोमवार को कहा कि राज्य में दक्षिण-पश्चिम मानसून की स्थिति अब काफी हद तक नियंत्रण में है। उन्होंने बारिश संबंधी आपदाओं में 15 लोगों की मौत और सात लोगों के लापता होने के बाद राहत एवं पुनर्वास पैकेज में वृद्धि की घोषणा भी की।
सरकार ने पुनर्वास के लिए वित्तीय सहायता बढ़ा दी है। इसके तहत भूमि खरीदने और मकान निर्माण के लिए दी जाने वाली सहायता राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दी गई है। वहीं, पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के लिए मुआवजा चार लाख रुपये से बढ़ाकर छह लाख रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा, आपदा में जान गंवाने वालों के परिजनों को राज्य आपदा मोचन कोष (एसडीआरएफ), मुख्यमंत्री राहत कोष (सीएमडीआरएफ) और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) के माध्यम से कुल आठ लाख रुपये की अनुग्रह सहायता प्रदान की जाएगी।
मॉनसून की स्थिति और आपदा प्रबंधन के उपायों का जायज़ा लेने के लिए ज़िला कलेक्टरों, मंत्रियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य भर में 316 राहत शिविरों में अभी 11,018 लोग रह रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक मृतक व्यक्ति के अंतिम संस्कार के खर्च के लिए 10,000 रुपये की तुरंत मदद मंज़ूर की गई है। राहत शिवरों से लौटने वाले परिवारों को घर की सफ़ाई के लिए 10,000 रुपये मिलेंगे जबकि जो लोग आजीविका से वंचित हो गये हैं, उन्हें हर राशन कार्ड में शामिल दो सदस्यों के लिए प्रति व्यक्ति 300 रुपये दिए जाएंगे। फसल के नुकसान के लिए मुआवज़ा भी बढ़ाया जाएगा और संशोधित प्रस्ताव अगली कैबिनेट बैठक में पेश किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित इलाकों में अग्निशमन और बचाव सेवाएं के कर्मचारियों और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल की टीमों को तैनात किया गया है। ज़्यादातर जगहों से बाढ़ का पानी उतर गया है, बस पथानामथिट्टा जिले की कुछ जगहों पर पानी का पूरी तरह से निकलना अभी बाकी है।
बचाव कार्यों को मज़बूत करने के लिए कोल्लम से चेंगन्नूर 14 नावें लाई गई हैं। तिरुवनंतपुरम में दो हेलीकॉप्टर स्टैंडबाय पर हैं जबकि पथानामथिट्टा और कोट्टायम ज़िलों में तीन बचाव टीमें तैनात की गई हैं।
अरक्कोणम से राज्य आपदा मोचन बल (एडीआरएफ) की दो और टीमें बुलाई गई हैं। ज़रूरत पड़ने पर अलग-थलग इलाकों में फंसे लोगों तक हवाई रास्ते से खाने के पैकेट पहुंचाने की तैयारी भी पूरी कर ली गई है।
श्री सतीशन ने जोखिम वाले इलाकों में रहने वाले लोगों से अपील की कि जब भी अधिकारी निर्देश दें वे सुरक्षित जगहों पर चले जाएं। उन्होंने कहा कि मुख्य जलाशयों में पानी का स्तर खतरे के निशान से काफी नीचे है और सिर्फ मूझियार बांध पर ही कड़ी नज़र रखने की जरूरत है। अभी इडुक्की बांध में पानी का स्तर 38.91 प्रतिशत और इडामलयार बांध में 46.64 प्रतिशत है।उन्होंने स्पष्ट किया कि छोटे बांधों के शटर संबंधित जिला कलेक्टरों की मंज़ूरी से ही खोले जाएंगे और चेतावनी दी कि जो लोग यह झूठी अफवाह फैला रहे हैं कि बांध खोले जा रहे हैं उनके खिलाफ़ सख़्त क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी।
शुरुआती आकलन के अनुसार, 165 हेक्टेयर से ज़्यादा जमीन पर खड़ी फ़सलें बर्बाद हुई हैं जिससे 3,596 किसान प्रभावित हुए हैं। सरकार ने खेती में हुए नुकसान के लिए सहायता राशि बढ़ाने का फैसला किया है और बढ़ी हुई सहायता राशि पर अगली कैबिनेट बैठक में विचार किया जाएगा।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित