कोल्लम , जुलाई 25 -- कोल्लम के जिला कलेक्टर एनी जूल थॉमस ने 'अंतरराष्ट्रीय डूबने से बचाव दिवस' के अवसर पर बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में केरल में डूबने से 1,385 लोगों की मौत हुई, जबकि 2023 में यह संख्या 1,344 थी।

श्री थॉमस ने 25 जुलाई को मनाए जाने वाले इस दिवस पर ऐसे हादसों को रोकने के लिए अधिक सावधानी और बचाव के उपायों की जरूरत बताई।

कलेक्टर ने जानकारी देते हुए बताया कि मौज-मस्ती के उद्देश्य से की गई यात्राओं और छुट्टियों के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं में डूबने वालों की संख्या अधिक होती है। आपदा प्रबंधन विभाग 'बदलाव के लिए साथ' संदेश के तहत बचाव के उपायों को मजबूत करने के लिए जनता के साथ मिलकर काम कर रहा है।

उन्होंने लोगों के डूबने की घटनाओं को रोकने के लिए नागरिकों की भागीदारी को अहम बताया। गौरतलब है कि कोल्लम जिले में कई जगहों पर डूबने की घटनाएं हुई हैं, जिनमें कल्लाडा सिंचाई परियोजना की नहरें, कल्लाडा, पल्लीक्कल और इथिक्कारा नदियां, सस्थमकोट्टा झील, अष्टमुडी और परावुर बैकवाटर्स, टीएस नहर और कोल्लम, थन्नी, अजीकल और पोझिकारा के समुद्र तट शामिल हैं। छोड़ी गई खदानों में पानी से भरे गड्ढों को भी संभावित खतरनाक जगहों के तौर पर पहचाना गया है। अंजान जलाशयों में जाना, पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा चेतावनियों को नजरंदाज करना, नशा करके पानी में उतरना और सोशल मीडिया रील बनाते समय लापरवाही भरी हरकतें करना डूबने की घटनाओं के मुख्य कारणों में शामिल हैं। घरों के पास के तालाबों और जलाशयों को भी संभावित खतरनाक जगहों के तौर पर पहचाना गया है, खासकर बच्चों के लिए।

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