तिरुवनंतपुरम , जनवरी 15 -- केरल में विश्वब्रह्मण आचार्य समिति ने प्रदेश के राजनीतिक दलों से आगामी विधानसभा चुनावों में विश्वकर्मा समुदाय के लिए समुचित और समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की अपील की है।
समिति ने एक बयान में कहा कि राज्य में विश्वकर्मा समुदाय की आबादी लगभग 40 लाख है। अगर मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियां समुदाय की लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक अनदेखी को दूर करने में नाकाम रहीं तो दूसरे विश्वकर्मा संगठनों के साथ मिलकर उम्मीदवार उतारने पर विचार करने का फैसला लिया जाएगा। समिति ने इसके साथ ही चेतावनी दी है कि अगर समुदाय को किनारे करना जारी रहा तो वह उन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है, जहां समुदाय के 10,000 से ज़्यादा मतदाता हैं। समिति ने ज़ोर दिया कि संविधान हर नागरिक और समुदाय को समान न्याय, समान अवसर तथा शासन में भागीदारी की गारंटी देता है। समिति ने आरोप लगाया कि पीढ़ियों से बिना किसी स्वार्थ के मेहनत करके देश और दुनिया के बुनियादी विकास में विश्वकर्मा समुदाय के अहम योगदान के बावजूद, इसे सालों से सत्ता की राजनीति से योजनाबद्व तरीके से दूर रखा गया है।
बयान में कहा गया है कि जहां दूसरे समुदाय अधिकार और पद पाने के लिए मुख्य राजनीतिक दलों में सक्रिय रूप से मुकाबला करते हैं, वहीं विश्वकर्मा राजनीतिक रूप से हाशिए पर बने हुए हैं। विश्वकर्मा समुदाय काम, सामाजिक, आर्थिक और शिक्षा के क्षेत्रों में पिछड़ा हुआ है।
बयान के मुताबिक समुदाय के पिछड़ेपन का अध्ययन करने के लिए सालों पहले शंकरन आयोग बनाया गया था और उसने अपनी रिपोर्ट दे दी थी, लेकिन एक के बाद एक सरकारें उसके नतीजों पर विचार-विमर्श करने या विधान मंडल में चर्चा शुरू करने में नाकाम रही हैं। जिसे उसने राजनीतिक उदासीनता बताया। समिति ने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों का चयन करते समय अलग-अलग राजनीतिक दलों में काम करने वाले विश्वकर्मा सदस्यों को उनकी आबादी के अनुपात में समुचित प्रतिनिधित्व दिए जाने की मांग की है।
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