तिरुवनंतपुरम , अप्रैल 25 -- केरल में बिना पूर्व सूचना के बिजली कटौती और बिजली प्रतिबंधों को लेकर विवाद गहरा गया है और विपक्ष ने मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन और उनकी सरकार पर निशाना साधा है।
शनिवार को जारी एक प्रेस बयान में, केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने आरोप लगाया कि राज्य का मौजूदा बिजली संकट पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी के कार्यकाल के दौरान हस्ताक्षरित दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौतों को रद्द करने का परिणाम है।
भीषण गर्मी के बीच, रात के समय या कभी भी अचानक बिजली कटौती होने से जनता में आक्रोश फैल गया है। विपक्ष ने पिछले एक दशक में "बिजली कटौती मुक्त केरल" बनाने के सरकार के बार-बार किए गए दावों पर सवाल उठाते हुए इसे भ्रामक एवं राजनीति से प्रेरित करार दिया है।
बयान के अनुसार, पिछली संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा सरकार ने 4.29 रुपये प्रति यूनिट की औसत दर पर 465 मेगावाट बिजली की खरीद के लिए एक दीर्घकालिक समझौता किया था।
विपक्ष का आरोप है कि मौजूदा सरकार ने इस समझौते को रद्द कर दिया है जिसके कारण राज्य को छह से 12 रुपये प्रति यूनिट की काफी ऊंची दरों पर बिजली खरीदनी पड़ रही है। उनका दावा है कि इसके कारण केरल राज्य विद्युत बोर्ड को प्रतिदिन 15-20 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि समझौते को रद्द करने में अनियमितताएं शामिल थीं और निर्णय लेने की प्रक्रिया की विस्तृत जांच की मांग की। उसने यह भी दावा किया कि इस कदम से निजी कंपनियों को फायदा हुआ जबकि सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ गया।
विपक्ष ने विरोध प्रदर्शनों के और तीव्र होने की चेतावनी देते हुए बिजली प्रतिबंधों को तत्काल हटाने और बिजली खरीद नीतियों को ज्यादा पारदर्शी बनाने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि अगर यूडीएफ सत्ता में वापस आता है तो इसकी व्यापक जांच की जाएगी।
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